मकड़ाई एक्सप्रेस 24 दिल्ली। यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर देश भर में जारी बहस और सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की प्रतिक्रिया सामने आई है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने स्पष्ट किया है कि संगठन का मूल मंत्र समाज में एकजुटता बनाए रखना है।
एकता और अदालती कार्यवाही पर संघ का रुख
सुनील आंबेकर ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि वर्तमान में यह मामला न्यायालय के अधीन है।
उन्होंने जोर देकर कहा न्यायिक प्रक्रिया के तहत चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने नए दिशा-निर्देशों पर रोक लगा दी है, इसलिए संघ अदालत के फैसले और विचाराधीन प्रक्रिया का सम्मान करता है। समाज में किसी भी प्रकार के विभाजन के बजाय एकता होनी चाहिए। संघ इस एकता को अक्षुण्ण रखने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या हैं यूजीसी के नए नियम ?
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित इन नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना है।इन नियमों के तहत प्रत्येक संस्थान को भेदभाव की शिकायतों की जांच के लिए विशेष समितियां बनाना अनिवार्य होगा। इन समितियों में ओबीसी (OBC), एससी (SC), एसटी (ST), दिव्यांग और महिला सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इन नियमों के पक्ष और विपक्ष में देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन देखने को मिले हैं।
अन्य समसामयिक विवादों पर स्पष्टीकरण
यूजीसी विवाद के अलावा, सुनील आंबेकर ने अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी संघ का पक्ष रखा
राष्ट्रवाद और रंग- ‘शहर को हरे रंग में रंगने’ वाले बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारत का सांस्कृतिक रंग अनादि काल से भगवा रहा है।
भाषाई अस्मिता – हालिया चुनावों में मराठी भाषा और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आरएसएस सभी भारतीय भाषाओं को ‘राष्ट्रीय भाषा’ मानता है। उन्होंने भारतीय परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि यहाँ सभी भाषाएं एक साथ फलती-फूलती हैं।
संघ का योगदान’- स्वतंत्रता संग्राम और देश की संप्रभुता पर उठने वाले सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि 100 वर्षों से संघ का हर कार्य केवल राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित रहा है।

