लद्दाख की Galwan Valley में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प में चीनी सैनिकों ने भारत के 4 अधिकारियों समेत 10 जवानों को बंधक बना लिया था। दोनों पक्षों के बीच हुई मेजर जनरल स्तर की वार्ता के बाद गुरुवार को चीनी सेना ने इन भारतीय अधिकारियों और जवानों को छोड़ दिया है। हालांकि, इस पर सेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने दावा किया था कि चीनी सेना ने भारतीय जवानों को बंधक बनाया था जिन्हें दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता के बाद वापस लौटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार से लेकर गुरुवार तक चली मेजर जनरल स्तर की वार्ता के बाद भारतीय जवानों को छोड़ा गया। 1962 के बाद यह पहला मौका है जब चीन ने भारतीय सैनिकों को अपनी कस्टडी में रखा। इस हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे जबकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के 43 जवान हताहत हुए थे।
वैसे भारतीय सेना ने गुरुवार को उन खबरों का खंडन किया था कि इस झड़प के बाद उसके सैनिक लापता हैं। सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि कोई भी भारतीय सैनिक लापता नहीं हैं।
LAC पर चीन से हिंसक संघर्ष के बाद से सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। वहीं, भारत-चीन के बीच सीमा विवाद पर अमेरिका लगातार नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने हिंसा में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में चर्चा के लिए आज शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में अलग-अलग पार्टियों के अध्यक्षों शामिल होंगे। हालांकि, ये वर्चुअल बैठक होगी जिसमें सभी दलों को पिछले कुछ दिनों से चीन के साथ चल रहे तनाव की जानकारी दी जाएगी। जवानों के शहीद होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत शांति चाहता है, लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में यथोचित जवाब देने में सक्षम में है।

