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कस सकता है आलोक वर्मा पर शिकंजा

नई दिल्ली: सीबीआई निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। सीवीसी जांच के अलावा अब उनके रिश्तेदारों सहित परिवार पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। यही नहीं, आलोक वर्मा ने सेवा के दौरान कितनी जांचों को प्रभावित किया और तिहाड़ जेल का डीजी रहने के दौरान उनके लंबित मामले क्या थे, इसकी जांच केन्द्र सरकार कराएगी। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में एक पत्र सीवीसी और डीओपीटी को भेजा गया है, जिसमें बताया गया है कि आलोक वर्मा ने अपने रिश्तेदारों सहित पत्नी और जानकारों को क्या-क्या फायदे पहुंचाए और उनके नाम कितनी बेनामी संपत्ति है। बताया जाता है कि सीवीसी ने इस पत्र को भी जांच में शामिल कर लिया है। यही नहीं, आने वाले दिनों में वे आयकर की जांच का सामना भी कर सकते हैं। बता दें कि हाल में आलोक वर्मा को हाईपावर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बैठक कर उन्हें निदेशक के पद से हटा दिया था और उनका तबादला कर दिया था, जिसके बाद आलोक वर्मा ने रिटायरमेंट का आवेदन कर दिया।

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गोपनीय शिकायतें भेजी सीवीसी व डीओपीटी को
बताया जाता है कि जिस तरह से आलोक वर्मा ने गोपनीय तरीके से स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना की बेटी की शादी के खर्चों सहित उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी सीवीसी को दी थी, उसी तरह से एक गुमनाम पत्र के जरिए सीवीसी और डीओपीटी को प्रॉपर्टी सहित उनके बेनामी संपत्ति की जानकारी दी गई है। शिकायती पत्र में ये भी बताया गया है कि आलोक वर्मा ने राजधानी में किस तरह कुछ माफियाओं को संरक्षण दिया हुआ है। इस पत्र के तहत उनकी नोएडा की संपत्ति सहित कुछ कंपनियों की जानकारियां दी गई हैं जो, उनकी पत्नी और परिजनों के नाम पर है। पत्र में बताया गया है कि आलोक वर्मा ने किस तरह पद पर रहकर टैक्स चोरी में इन लोगों की मदद की। ये पत्र सीवीसी को शुक्रवार को दिया गया है।
सरकार करेगी परेशान, पहले ही बोल चुके हैं आलोक
आलोक वर्मा ने अपने इस्तीफे के बाद ही बयान जारी किया था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़े और ईमानदारी से काम किया, लेकिन जिस तरह से मुझे हटाया गया मैं हैरान हूं कि क्या ईमानदारी की ये सजा दी जाती है। उन्होंने कहा था कि उनके इस्तीफे के बाद उनकी मुश्किलों का दौर भी आएगा, लेकिन वे तैयार हैं।
कोर्ट को भी दी जाएगी जानकारी
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार कोर्ट में भी आलोक वर्मा के प्रॉपर्टी समेत अन्य सामने आई जानकारियों को देगी, ताकि ये बताया जा सके कि वे भ्रष्ट हैं या नहीं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उनको बहाल करते समय सीवीसी को एक निर्देश दिया था कि आलोक वर्मा की जांच से आए तथ्यों को कोर्ट के सामने जरूर प्रस्तुत करें।