उठते सवाल क्यों नही कर रहे फटाखे के अवैध भंडारण पर स्थानीय तहसीलदार, थानेदार कार्यवाही
हरदा से ओम केरवार की रिपोर्ट
मकड़ाई समाचार हरदा। जिले के हंडिया तहसील मुख्यालय पर पटाखा व्यापारियों ने अपने घरों में पटाखों का अवैध भंडारण करके रखा है। दीपावली पर्व को अब सिर्फ कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इसके साथ ही पटाखों का अवैध भंडारण भी दुकानदारों ने अपने ही मकानों में रिहायशी इलाकों कर लिया है।
नियमानुसार पटाखे रखने के लिये व्यापारियों के पास अलग से गोडाऊन होना चाहिए। लेकिन हंडिया तहसील मुख्यालय, पुलिस थाना होने के बाद भी व्यापारियों के गोडाऊन का निरीक्षण किसी ने नही किया। यह इन अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे है। बेहद गंभीर पहलू यह है कि नगर रिहायशी इलाकों में कारोबारियों ने अपने मुनाफे के लिए घरों में ही पटाखों का भंडारण कर रखा है।विस्फोटक अधिनियम के तहत पटाखों का भंडारण मैदानी क्षेत्र में किया जाना चाहिए। ताकि किसी तरह की आगजनी की अनहोनी पर कोई बड़ा हादसा न हो।
नवरात्र पर्व खत्म होने के साथ ही दीपावली की तैयारी लोगों ने शुरू कर दी थी। तभी से नगर में पटाखे पहुंचने लगे थे। हालांकि अभी गिने-चुने व्यवसायियों ने ही पटाखा मंगाया है। दो-तीन दिन बाद सभी व्यवसायियों के पास और भी फटाखे पहुँच जायेगे। ऐसा भी नही है कि रिहायशी इलाको में पटाखा संग्रह की जानकारी प्रशासन व पुलिस को न हो, जानकारी होने के बाद भी जांच पड़ताल की खानापूर्ति कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है।
जब इस संबंध में हंडिया तहसीलदार अर्चना शर्मा से जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि आपसे जानकारी मिली है, हम दिखवाते है। इससे इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्व विभाग, आर आई पटवारी सहित स्थानीय पुलिस प्रशासन का मुखबिर तंत्र इतना कमजोर हो गया है। उनकी नाक के नीचे फटाखा व्यापारियों ने लाखों का अवैध पटाखा अपने-अपने घरों में भर कर रखा है। एक सवाल ओर उठता है कि प्रतिवर्ष जब पटाखा व्यापारियों के लायसेंस रिन्यू होते है। तब विभागीय अधिकारियों को जांच करना होता है। ऐसे में इन अधिकारियों की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल उठ रहे है। सूत्रों की माने तो प्रतिवर्ष फटाखा व्यापारी कार्यवाही से बचने के लिये मोटी रकम स्थानीय प्रशासन को देते है। जिसके कारण इन व्यापारियों के हौसले बुलंद है। और यही कारण है कि स्थानीय रहवासियों की जान की कोई कीमत नही होती, और प्रशासन मोन है।

