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लापरवाही का मामला – भगवती नर्सिंग होम  में हुई युवती की मौत, मनीष शर्मा ने भगवती में करवाया था भर्ती !

मकड़ाई समाचार हरदा। भगवती नर्सिंग होम जहां पर समाज की होनहार हंसती खेलती बिटिया लवली रूप दास वैष्णव 25 वर्ष निवासी पोखरनी खिरकिया जिसने अपने छोटे से जीवन में समाज सेवा के क्षेत्र में अनेकों ट्राफिया शील्ड प्रमाण पत्र अर्जित किए और कोरोना काल में जब सब लोग अपने घरों में बैठे थे जी जान लगाकर लोगों की सेवा की थी वह आज भगवती नर्सिंग होम के अस्पताल स्टाफ एवं डॉक्टरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई ।

28 तारीख रविवार के दिन दोपहर के 3:00 बजे ततैया ने काटने पर जिसका इलाज खिरकिया अस्पताल में डॉक्टर विश्वकर्मा द्वारा किया गया।  बाद में उन्होंने हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी

हरदा केजाने-माने डॉक्टर मनीष शर्मा के द्वारा
लगभग 7:00 बजे भगवती नर्सिंग होम में एडमिट करने के बाद 9:00 बजे तक जनरल वार्ड में ही इलाज करते रहे । मेरे बार बार कहने पर भी दूसरी जगह ले जाने का मना बोलते रहे।  आश्वासन देते रहे कि खतरे की कोई बात नहीं है 2 घंटे तक बीपी लो की कंडीशन में जनरल वार्ड में रखा बॉटल चढ़ा दी और बीपी की जांच करते रहे एडमिट करने के15:20 मिनट बाद डॉ मनीष शर्मा ने आकर चेक किया और ट्रीटमेंट बताकर चले गए। आधा घंटा इलाज होने के बाद छाती दर्द और पेट दर्द कम होने की बजाय बढ़ता गया मैंने स्टाफ नर्स को अवगत करवाया तो वह और आधे घंटे वेट कर लीजिए । अभी ट्रीटमेंट दिया है आराम लगता ही लगेगा और 1 घंटे वेट कर लीजिए इस प्रकार  पूरे 2 घंटे निकाल दिए। 2 घंटे तक बीपी नहीं आया फिर ज्यादा तकलीफ बढ़ने लगी छटपटाने लगी तब मौजूद स्टाफ नर्स से मिन्नते करके इलाज करने वाले डॉक्टर का नंबर मांगा तो उन्होंने दीवार तरफ इशारा करके बता दिया कि वह लिखा है उस पर।  फोन लगाया तो डॉक्टर मनीष शर्मा ने काउंटर पर फोन करके उनको फिर से कुछ ट्रीटमेंट देने की हिदायत दी।  काउंटर पर बैठे महाशय ने स्टाफ नर्स को ट्रीटमेंट देने और डॉक्टर से बात करने का बोला तो स्टाफ नर्स बोली आप ही कर लीजिए आप अच्छी तरह से बात कर लेंगे । ऐसी इनकी हंसी मजाक काउंटर पर लगभग 10 मिनट चलती रही । वापस ट्रीटमेंट देने लड़की के पास आए तब उसकी  हालत काफी गंभीर हो चली थी दर्द से बुरी तरह छटपटा रही थी।  मैंने फौरन डॉक्टर साहब को फोन लगाया  तब  आईसीयू में ले जाने की बात की।   आईसीयू में ले जाने से पहले लगभग 15-20 मिनट दवाई गोली और कागजी खानापूर्ति में बर्बाद कर दिए । जो दवाई दिलवाई थी मेडिकल से उसको रिजेक्ट करके वापसी करने भिजवाया तब तक सिर्फ मशीनों से इलाज चलता रहा।  जब इंजेक्शन बदलने मेडिकल स्टोर पर गया है तो उसने कहा है कि सिर्फ यही इंजेक्शन है।  जो बुलवाया है वह नहीं है।  फिर वापस उस इंजेक्शन दौड़ लेकर दूसरी मंजिल पर गया तब भी लड़की की हालत दयनीय थी और सिर्फ स्टाफ द्वारा उठापटक की जा रही थी।   उसी दौरान दर्द के मारे बाथरूम कर दी और दम तोड़ दिया।  फिर भी स्टाफ और डॉक्टरों द्वारा उपचार सिर्फ उठापटक जारी रहा फिर बारी बारी से सब छोड़कर नीचे आ गए । सिर्फ दो नर्स लड़कियां ऊपर रही उनसे हमने पूछा उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया हम भी फिर डॉक्टर के पास आए  तो उन्होंने घर ले जाने को बोल दिया हमने पूछा डेथ हो गई क्या तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया और कहने लगे अब घर लेकर चले जाओ और पीएम भी वही खिरकिया मे करवा लेना।

हमने पीएम हरदा में ही करवाने की मांग की एवं इलाज के फाइल कागज मांगे तो देने में आनाकानी करते रहे । बोले फाइल सुबह बॉडी के साथ ही मिलेगी।
इलाज में लापरवाही ना की जाती तो शायद इतनी दर्दनाक मौत नहीं होती। हम किसी से बदला नहीं लेना चाहते सिर्फ इतना निवेदन है कि भगवती नर्सिंग होम की लापरवाही की सजा किसी और को न भुगतना पड़े

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आज  पोस्टमार्टम होने वाला है जिसके लिए हमें रात को ही पुलिस ने आईसीयू में आकर सूचना दी कि सुबह जल्दी करवा लेना हम चाहते हैं कि पीएम निष्पक्ष रुप से हो एवं जवाबदार डॉक्टर एवं महिला डॉक्टरों की उपस्थिति में हो और पीएम की वीडियोग्राफी हो जिसमें वास्तविकता का पता चल सके कि कहीं लापरवाही से कम या ज्यादा मात्रा में ट्रीटमेंट देने से तो मृत्यु नहीं हो गई। अभी अभी 7:00 बजे फिर पुलिस का फोन आ गया है पीएम जल्दी करवाने के लिए

मरने के बाद, इलाज की मांगी सहमति –

भगवती नर्सिंग होम पर पेशेंट की डेथ बॉडी देते समय भी एक कागज पर हस्ताक्षर करवाने के लिए बोला गया उस कागज पर लिखा था कि मैं पेशेंट का इलाज करवाने के लिए अनुमति देता हूं। जरा सोचिए जो इंसान मर गया है उसके इलाज के लिए आप अनुमति दे सकते हैं जब सीएचएमओ साहब से बात हुई उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

पुलिस ने मर्ग रिपोर्ट लिखकर मामला जांच में लिया है।

(जैसा मृतका के परिजनों ने मकड़ाई एक्सप्रेस को बताया)