मकड़ाई समाचार भैंसदेही/बैतूल। तहसील क्षेत्र के ग्राम घुड़िया में प्राथमिक स्कूल जब बंद होने की कगार पर पहुंच गया तो वहां पदस्थ शिक्षिका अरूणा महाले ने एक नवाचार किया। उन्होंने गांव के बच्चों के स्कूल न आने की पड़ताल की तो पता चला कि ढाने में रहने के कारण स्कूल की दूरी से पालक भी बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज कर रहे हैं। शिक्षिका ने पालकों को समझाइश दी और स्वयं ही उन्हें स्कूल ले जाने और वापस छोड़ने का विकल्प दिया। इससे बच्चे भी खुश हो गए और उनके पालकों को पैदल सड़क पर चलने से हादसे की आशंका से भी मुक्ति मिल गई। इस नवाचार का यह असर हुआ कि सात साल पहले जिस स्कूल में मात्र 10 बच्चे ही रह गए थे, वहां अब पहली से कक्षा पांचवीं तक 85 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। अभी भी शिक्षिका स्कूल के समय से पहले पहुंचकर 17 बच्चों को बारी-बारी से अपनी बाइक पर बिठाकर स्कूल तक लाती हैं और वापस घर तक छोड़ने का काम करती हैं।
शिक्षिका अरूणा ने बताया कि स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन दर्ज संख्या घटकर 10 पर आ गई थी। ऐसे में शासन स्तर से स्कूल बंद करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई थी। पालकों को समझाइश देने के साथ ही पारिवारिक माहौल में पढ़ाई कराना शुरू किया गया। इसका परिणाम है कि अब स्कूल बंद होने की प्रक्रिया से बाहर हो गया है और पालकों के साथ बच्चे भी खुश हैं। ग्राम कौड़ीढाना में निवास करने वाली शिक्षिका स्कूल खुलने के निर्धारित समय से पहले गांव में पहुंच जाती हैं। स्कूल घुड़िया नई में है और उसका एक ढाना घुड़िया है जहां से स्कूल की दूरी करीब दो किमी है। इतनी दूरी तय करने में प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को बेहद परेशानी होती थी। अब सभी बच्चे शिक्षिका के साथ बाइक पर बैठकर स्कूल पहुंचते हैं और छुट्टी होने पर वापस घर भी आ जाते हैं। ग्राम की रूपा बामने ने बताया कि शिक्षिका के द्वारा प्रारंभ किए इस नवाचार के कारण बच्चे सुबह खुद ही स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। घर के सामने से शिक्षिका उन्हें बाइक पर बिठा लेती हैं और वापस भी पहुंचा देती हैं। राधिका कापसे ने बताया कि पहले तो पैदल स्कूल भेजने में सभी को डर लगता था लेकिन अब कोई चिंता ही नही रहती है।

