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अजमेर में मां चामुंडा का वो अनोखा मंदिर जहां तलवारों के बीच होती है आरती

अजमेर। राजस्थान के अजमेर ज़िले के बोराज गांव की अरावली पहाड़ियों पर एक खास मां चामुंडा का मंदिर है, जिसकी स्थापना 11वीं सदी में वीर सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने की थी। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इतिहास और चमत्कारों से भी जुड़ा हुआ है।

चमत्कारिक है जलकुंड कभी पानी खत्म नही हुआ रोगमुक्त करता है

मंदिर परिसर में एक छोटा जलकुंड है, जो करीब ढाई फीट गहरा और ढाई फीट चौड़ा है, और जिसे पौराणिक चमत्कार माना जाता है। मंदिर के बनने के बाद से आज तक इस कुंड का पानी खत्म नहीं हुआ। खास बात यह कि सर्दी में यह पानी गर्म रहता है और ग्रीष्म में ठंडा, और इसे गंगा के पवित्र जल के समतुल्य माना जाता है। मान्यता है कि इसी कुंड के जल से मां चामुंडा का स्नान होता है और इसके जल से लोग रोगमुक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि पाते हैं।
इतना ही नहीं, इस कुंड में श्रद्धालु सिक्के डालकर अपनी मन्नतें मांगते हैं, जो श्रद्धा का प्रतीक है।

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आशीर्वाद से 17 बार मौहम्मद गौरी को हराया

भारत के इतिहास मे पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी का युद्ध अमिट है 17 बार उसे हराया गया। मंदिर के पुजारी मदन सिंह बताते हैं कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्वयं मां चामुंडा के अनन्य भक्त थे, और यही उनकी कृपा थी। जिससे उन्होंने मोहम्मद गौरी को 17 बार हराया।

1300 फिट उंची पहाड़ी पर है मंदिर

मां चामुंडा का यह मंदिर लगभग 1300 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जहां पर हर भक्त मां के दर्शन कर चुनरी बांधकर अपनी आस्था प्रकट करता है। यहाँ की परंपरा में खास बात यह है कि आरती तलवारों के बीच होती है, जो वीरता और शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि इतिहास की गाथा भी है, जो राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की मूरत है।