jhankar
ब्रेकिंग
छात्रावास में लापरवाही का आरोप - शिकायत के बाद डर में छात्राएं, कांग्रेस ने की जांच की मांग सिराली में4 साल से शुरू नहीं हुआ नकद खाद केंद्र-भाकिसं शहर में गूंजा जय श्रीराम - राम फेरी ने मनाया 15वां स्थापना दिवस, बुजुर्गों का किया सम्मान पुराना बस स्टैंड पर अंबेडकर प्रतिमा स्थापित करने की मांग एससी-एसटी संगठनों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञा... ग्राम उड़ा में विशाल बैलगाड़ी दौड़ संपन्न ट्रंप का बड़ा फैसला - CNN समेत 3 मीडिया हाउस व्हाइट हाउस से बैन अगर ‘छात्रों की गूंज’ हिट हुई तो MP की सियासत में क्या बदलेगा.. ? भाजपा कांग्रेस के किन नेताओ पर क्य... पंप के ऑफिस में घुसकर की तोड़फोड़ और कैश लूटा,घटना CCTV में हुई कैद न्यायालय परिसर में लगा वृहद स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, 37 लोगों की हुई जांच ट्रंप ने फिर फोड़ा 100%टैरिफ का बम रूस से तेल खरीदने पर लगेगा 100% टैक्स, भारत-चीन सीधे निशाने पर

बनते-बनते बदली ओवरब्रिज की दिशा, SDM ने मांगी रिपोर्ट

सीहोर। सीहोर शहर में पुराने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास रेलवे गेट क्रमांक-104 पर बन रहा ओवरब्रिज अब विवादों में है। जब इस अधूरे ब्रिज की तस्वीर ड्रोन कैमरे से ली गई, तो यह भोपाल की तरह 90 डिग्री के तीखे मोड़ में नजर आया। दृश्य देखकर स्थानीय नागरिकों में रोष फैल गया। उनका कहना है कि ब्रिज की डिजाइन में बदलाव कर मनमानी की गई है, जिससे अब दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।

28 करोड़ की लागत, पर अधूरी योजना
जानकारी के अनुसार यह ओवरब्रिज 28 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। इसकी लंबाई 700 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर रखी गई है। इसके लिए 24 पिलर तैयार हो रहे हैं। दस मीटर ट्रैक के ऊपर 7.30 मीटर ऊंचाई तय की गई है। निर्माण शुरू होने के साथ ही तकनीकी खामियां उजागर होने लगीं। रहवासियों का कहना है कि अधिकारियों ने सर्वेक्षण किए बिना ही कार्य शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप अब ब्रिज की दिशा बदलनी पड़ी, जिससे यह 90 डिग्री एंगल का हो गया।

- Install Android App -

दोनों तरफ एप्रोच रोड न बनने से गुस्सा
यह ब्रिज शहर के सबसे व्यस्त मार्ग पर बन रहा है, जहां रोज हजारों वाहन और स्कूली बच्चे गुजरते हैं। इसके बावजूद दोनों तरफ एप्रोच रोड नहीं बनाई जा रही। इस कारण लोग असुरक्षित रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों घनश्याम गुप्ता, मनोज गुजराती का कहना है कि हम विकास के खिलाफ नहीं, गलत डिजाइन के खिलाफ हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो वे लोकायुक्त, मानव अधिकार आयोग और आखिरकार हाई कोर्ट तक जाएंगे।

डिजाइन में गंभीर खामियां, जिम्मेदारी तय नहीं
ब्रिज के डिजाइन को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कई इंजीनियरिंग गलतियां हैं। जहां ब्रिज उतरता है, वह भूमि निजी स्वामित्व की है। इस गलती के कारण मजबूरन निर्माण एजेंसी को ब्रिज को मोड़ना पड़ा और सिर्फ एक ओर सर्विस रोड दी गई। यही कारण है कि अब यह ब्रिज प्रदेश का शायद पहला ऐसा लहराता ओवरब्रिज बन गया है, जो सुरक्षा की बजाय जोखिम का प्रतीक बन गया है।