jhankar
ब्रेकिंग
Aaj Ka Rashifal: आज दिनांक 18 मार्च 2026 का राशिफल, जानिए आज क्या कहते है आपके भाग्य के सितारे धर्मध... नर्मदा पुरम जिले का पहला मामला :  खेत में आग लगाने व जान से मारने की धमकी देने वाले पर ,  हरदा : कमिश्नर एवं आईजी ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया खेत में खड़ी फसल में आग लगाई दी जान से मारने की धमकी , शिवपुर पुलिस ने किया आरोपी के खिलाफ विभिन्न ध... हरदा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 मार्च को राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में होंगे शामिल हरदा : नरवाई जलाने पर प्रशासन ने की सख्त कार्यवाही, 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया हरदा : इंदौर, उज्जैन, भोपाल व नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से होगी गेहूँ खरीदी हरदा : विद्यार्थियों से संवाद कर अग्निवीर भर्ती के लिए किया प्रेरित हरदा : जल महोत्सव गांव का उत्सव के तहत ग्राम नयापुरा में कार्यक्रम सम्पन्न हरदा : अधिकारियों ने जनसुनवाई में सुनी नागरिकों की समस्याएं

भोजशाला के पत्थरों ने उजागर किया सदियों पुराना रहस्य, 16 मार्च की सुनवाई पर सबकी नजरें

धार। ऐतिहासिक भोजशाला की धरती से आखिरकार वह साक्ष्य सामने आया है, जिसका वर्षों से इंतजार था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के उत्खनन में पत्थर का दुर्लभ शिल्पखंड मिला है, जिस पर देव आकृतियां उकेरी हुई हैं।

यह संभवतः पहली बार है जब भोजशाला के मंदिर स्वरूप का इतना सुस्पष्ट प्रमाण तस्वीर के साथ सामने आया है।यह साक्ष्य ऐसे समय सार्वजनिक हो रहा है जब 16 मार्च (सोमवार) को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर सुनवाई होनी है।

अलग-अलग संरचनात्मक परतें सामने आईं
वर्ष 2024 में एएसआइ द्वारा किए गए उत्खनन में कई अन्य महत्वपूर्ण संकेत भी सामने आए हैं। खोदाई के दौरान एक स्थान पर मिट्टी की एक मीटर मोटी परत के नीचे प्राचीन संरचना दिखी, जबकि एक अन्य स्थान पर पांच मीटर गहराई तक अलग-अलग संरचनात्मक परतें सामने आईं। इससे स्पष्ट होता है कि इस परिसर में प्राचीन काल से निर्माण गतिविधियां होती रही हैं।

- Install Android App -

पत्थरों से बनी दीवार जैसी संरचना भी मिली
परिसर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में पत्थरों से बनी दीवार जैसी संरचना भी मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन अवशेषों से भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप को समझने में बड़ी मदद मिलेगी। नींव में पत्थर-ईंट की परतें, सिक्के व स्थापत्य अवशेष मिले हैं। खोदाई में पत्थर व ईंटों की दीवारें, मंच, फर्श की परतें और कई स्थापत्य अवशेष सामने आए हैं। इनसे परिसर में अलग-अलग कालखंडों में निर्माण व पुनर्निर्माण के प्रमाण मिलते हैं।

कुछ अवशेष राजा भोज के काल के
कुछ अवशेष राजा भोज के काल यानी 11वीं शताब्दी से जुड़े होने के संकेत देते हैं। साल 2024 में सर्वे के दौरान सात ट्रेंच और कुछ परीक्षण गड्ढों में खोदाई की गई थी। मलबा हटाने पर मूर्तियों के टुकड़े और घरेलू वस्तुएं मिलीं मलबा हटाने के दौरान मूर्तिकला के खंड, स्थापत्य अवयव, सिक्के और अंगूठियां मिलीं। साथ ही अनाज पीसने के पाट, ओखली-मूसल जैसी घरेलू वस्तुएं भी सामने आईं।

परमार काल की धरोहर के बारे में भी जानकारी दी गई
उत्तर दिशा में चूने से पलस्तर किया हुआ बड़ा फर्श और तीन सीढ़ियों वाली संरचना भी मिली है। इंदौर के एडवोकेट और विशेषज्ञ विनय जोशी ने बताया कि रिपोर्ट में एक स्थान पर परमार काल की धरोहर के बारे में भी जानकारी दी गई है। उत्खनन के लिए जो ट्रेंच खोदी गई थीं, उनसे प्राप्त धरोहर अपने आप में यह प्रमाण देती हैं कि यह धरोहर भोजकालीन है।

मस्जिद पक्ष करेगा विरोध
मस्जिद पक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह सर्वे रिपोर्ट की बातों का विरोध करेगा। ऐसे में यह सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है। कोर्ट के आदेश पर सभी पक्षों को एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट सौंप दी गई है।