बुजुर्ग मां की गुहार पर एसडीएम कोर्ट का बड़ा फैसलाः पांचों बेटों को हर महीने भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश
हरदा : न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी खिरकिया, रजनी वर्मा ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और भरण-पोषण को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। 85 वर्षीय अतिवृद्ध महिला गीताबाई बेवा नर्मदाप्रसाद सोनी, निवासी सिराली की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसडीएम रजनी वर्मा ने उनके पांचों पुत्रों को अपनी मां के भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह तय राशि देने का आदेश दिया है।
आवेदिका गीताबाई ने एसडीएम कोर्ट में आवेदन देकर बताया था कि वे अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने, देखने और सुनने में असमर्थ हैं। ग्राम पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 (रकबा 3.861 हेक्टेयर) की संयुक्त भूमि में उनका 1/8 हिस्सा दर्ज है।
उनके बेटों द्वारा इस जमीन को खोट/बटाई (लीज) पर दिया जाता है और उससे प्राप्त पूरी आय का वे स्वयं उपभोग करते हैं। वृद्ध मां का आरोप था कि जमीन की आय में से उन्हें कोई हिस्सा या आर्थिक मदद नहीं दी जाती, न ही उनका कोई ध्यान रखा जाता है। इतना ही नहीं, जमीन पर बैंक का केसीसी ऋण बकाया है, जिसे भी उनके पुत्र चुकता नहीं कर रहे हैं।
मामले की सुनवाई और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद एसडीएम कोर्ट ने ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत आवेदिका के पांचों पुत्रों राजेन्द्रप्रसाद, गोपालप्रसाद, गोविन्द, नारायण और प्रमोद सोनी को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक माह की 10 तारीख तक अपनी मां को दो-दो हजार रुपये कुल दस हजार रुपये प्रतिमाह नकद या उनके बैंक खाते में अनिवार्य रूप से जमा कराएं।
यदि पुत्र नियमित रूप से यह राशि जमा करने में विफल रहते हैं, तो पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 की खोट/बटाई से प्राप्त कुल आय में से मां के हिस्से की राशि सीधे उन्हें प्रदान की जाएगी। आदेश की अवहेलना करने पर अनावेदक (पुत्रों) के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी वसूली और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

