पटवारी की अनुशंसा पर पंचायत ने दी थी पेड़ हटाने की स्वीकृति, तहसीलदार ने अनुमति देने से किया इनकार
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 | रहटगांव। एक ओर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पौधरोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर हरदा जिले के रहटगांव में करीब 18 हरे-भरे फलदार आम के पेड़ों को जेसीबी से जड़ सहित उखाड़ने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई के बाद पेड़ों को हटाने की अनुमति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रहटगांव-कासरनी मार्ग स्थित एक खेत में जेसीबी मशीन की मदद से करीब 18 बड़े और फलदार देसी आम के पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि ये पेड़ कई दशक पुराने थे और क्षेत्र में फल देने के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
पटवारी की अनुशंसा पर पंचायत ने दी अनुमति
इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच सुमंत्रा बाई ने बताया कि पटवारी सुमेर सिंह राजपूत की अनुशंसा पर पंचायत की ओर से पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई थी। वहीं मामले को लेकर तहसीलदार शंकर सिंह रघुवंशी ने स्पष्ट किया कि उनके स्तर से पेड़ हटाने की कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत को इतने बड़े फलदार पेड़ों को हटाने की अनुमति देने का अधिकार नहीं है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायत को अधिकार नहीं था, तो फिर किस आधार पर अनुमति दी गई? क्या नियमानुसार संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृति ली गई थी? पूरे मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच जरूरी हो गई है।
18 फलदार पेड़ों को हटाने से पर्यावरण को नुकसान
क्षेत्र में पहले से ही पुराने देसी आम के फलदार पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में एक साथ 18 बड़े पेड़ों को जड़ से उखाड़ना पर्यावरण की दृष्टि से गंभीर विषय है। ये पेड़ न केवल फल उपलब्ध कराते थे, बल्कि छाया, स्वच्छ हवा और जैव विविधता बनाए रखने में भी सहायक थे।
एक तरफ शासन पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुराने फलदार पेड़ों को इस तरह हटाए जाने से सरकारी अभियानों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं।
निष्पक्ष जांच के बाद तय हो जिम्मेदारी
मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या निष्पक्ष जांच कराई जाती है।
यदि पेड़ों को हटाने में निर्धारित नियमों और अनुमति प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि 18 पुराने फलदार पेड़ों को हटाने की अनुमति किसने और किन परिस्थितियों में दी थी।

