वर्षा से जलमग्न होने वाले स्थानों पर आवश्यक सूचना बोर्ड लगाये जाएं
स्वास्थ्य, स्थानीय निकाय, विद्युत एवं पशुपालन विभाग अतिवृष्टि की स्थिति से निपटने की अभी से तैयारी करें
अतिवर्षा एवं बाढ़ की स्थिति से निपटने की पूर्व तैयारियों संबंधी बैठक आयोजित
हरदा : कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन की अध्यक्षता में सोमवार को अतिवर्षा एवं बाढ़ की स्थिति से निपटने संबंधी बैठक आयोजित की गई। बैठक में अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिये संबंधित विभागों को अभी से तैयारी करने के निर्देश दिये गये। साथ ही कहा गया कि वर्षा से जल मग्न होने वाले स्थानों पर आमजन को सचेत करने वाले सूचना बोर्ड लगाये जाएं। बरसात के दौरान सभी पुल पुलियाओं पर बेरियर लगे हों एवं चौकीदार तैनात रहें।
पुल पुलियाएं जल मग्न होने की स्थिति में वाहनों की आवाजाही न हो, इसके लिये संबंधित विभाग सचेत रहें। कहीं भी पुल पुलियाओं पर दुर्घटना की स्थिति न बनें। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री शंशांक, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंजली जोसेफ जोनाथन, संयुक्त कलेक्टर श्री सतीश राय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
बैठक में निर्देश दिये गये कि पुलिस एवं होमगार्ड के पास उपलब्ध मोटर वोट्स एवं अन्य बचाव सामग्री तैयार हालत में रखी जाए। पुलिस एवं होमगार्ड के जवानों को बाढ़ से बचाव संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाए। अतिवर्षा के कारण नदी नाले उफान पर होने की स्थिति में इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दी जाए। अस्थाई कैम्पों हेतु भवनों का चिन्हांकन एवं आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित की जाए।
जर्जर भवनों के संबंध में आवश्यक कार्यवाही कर ली जाए। अतिवर्षा या बाढ़ की स्थिति में निचली बस्तियों में रहने वाली जनसंख्या को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की भी कार्य योजना तैयार रहे। सड़क निर्माण से संबंधित विभागों द्वारा पुलों पर यातायात नियंत्रण हेतु बेरियर लगाये जाएं। क्षतिग्रस्त पुलियाओं की मरम्मत करवाई जाए। सड़कों पर गड्ढे भी न रहें। खतरनाक स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाये जाएं।
परिवहन विभाग द्वारा ओवर लोडिंग पर नियंत्रण किया जाए। पुराने सवारी वाहनों की फिटनेस की जांच की जाए। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नालों एवं नालियों की सफाई व्यवस्था की जाए। जल संसाधन विभाग अंतर्गत समस्त बांधो, तालाबों के तटबंधों के संबंध में सुनिश्चित किया जाए कि वे अतिवर्षा अथवा बाढ़ के दबाव को सहन करने में सक्षम हैं। बड़े बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति में निचले क्षेत्रों में आवश्यक सूचना प्रदान करने की व्यवस्था तैयार रखी जाए।
स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत बाढ़ संभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा एवं दवाईयों की उपलब्धा सुनिश्चित की जाए। सर्पदंश की घटनाओं के दृष्टिगत एंटीवेनम की पर्याप्त उपलब्धता रहे। आपातकालीन स्थिति में चिकित्सा दलों का गठन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भण्डारण किया जाए। बीमारियों की रोकथाम के लिये ब्लीचिंग पावडर, क्लोरिन टेबलेट, लाइम पावडर की भी उपलब्धता रहे।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की गुणवत्ता का परीक्षण कर लिया जाए। साथ ही पेयजल के शुद्धिकरण के लिये इंतजाम रखे जाएं। कृषि विभाग द्वारा खाद, बीज, कीटनाशक एवं अन्य सामग्री के पर्याप्त एवं सुरक्षित भण्डारण की व्यवस्था की जाए। यथा समय कृषकों को कीट व्याधि एवं अतिवर्षा की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। पशुपालन विभाग अंतर्गत चिकित्सकों के दलों का गठन, दवाईयों की उपलब्धता एवं चारे घास का भण्डारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पशुओं के उपचार हेतु पर्याप्त औषधियों का भण्डार रखा जाए। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा पहुँचविहीन क्षेत्रों में खाद्यान्न का भण्डारण सुनिश्चित किया जाए। विद्युत विभाग बाढ़ एवं अतिवृष्टि की स्थिति में विद्युत सप्लाई एवं संचार प्रणाली सक्रिय रखने के इंतजाम करें। साथ ही बाढ़ की स्थिति में प्रभावित बस्तियों में पावर कट करने की व्यवस्था भी रखी जाए।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बरसात के दौरान महिलाओं एवं बालकों के स्वास्थ्य शिक्षा एवं अन्य आवश्यकताओं के संरक्षण की व्यवस्था की जाए। खनिज विभाग द्वारा बंद पड़ी खदानों एवं खनन पश्चात खुले छूटे स्थलों में जल भराव की स्थिति के कारण जनहानि अथवा पशु हानि होने की संभावनाओं के दृष्टिगत इन खुले छूटे स्थलों का प्रबन्धन किया जाए। आपात स्थिति में हेलिकॉप्टर की लेण्डिंग के लिये भी स्थलों का चयन कर लिया जाए।

