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श्रम प्रहरी’ बन अपंजीकृत संस्थानों की जानकारी देकर श्रमिक कल्याण में करें योगदान

टोल-फ्री श्रमिक हेल्पलाइन नंबर 1800-233-8888 पर दे सूचना

हरदा : श्रमिकों को सुरक्षित कार्यदशाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से श्रम विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। आम नागरिक ‘श्रम प्रहरी’ के रूप में आगे आकर अपंजीकृत संस्थानों और निर्माण स्थलों की गोपनीय सूचना दे सकते हैं, जिससे श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ लक्षित वर्ग तक सुचारू रूप से पहुँचाया जा सके।

श्रमिकों के हितों के संरक्षण और कार्यस्थल पर उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए सभी संस्थानों एवं निर्माण स्थलों का श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीयन होना अनिवार्य है, पंजीकरण न होने की स्थिति में श्रमिक सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

श्रम विभाग द्वारा कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए वर्तमान में संचालित व पंजीकृत निर्माण कार्यों, अति-खतरनाक और अन्य कारखानों की ऑनलाइन सूची विभाग के आधिकारिक पोर्टल labour.mp.gov.in पर सार्वजनिक कर दी गई है। आम नागरिक इस पोर्टल पर जाकर पंजीकृत संस्थानों की जांच कर सकते हैं

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और यदि कोई भी संस्थान या निर्माण स्थल अपंजीकृत पाया जाता है, तो वे ‘श्रम प्रहरी’ की भूमिका निभाते हुए इसकी सूचना टोल-फ्री श्रमिक हेल्पलाइन नंबर 1800-233-8888 पर दे सकते हैं। नागरिकों द्वारा प्राप्त प्रामाणिक सूचनाओं के आधार पर श्रम विभाग द्वारा संबंधित स्थलों का त्वरित परीक्षण कर आवश्यक कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पंजीकरण न कराने वाले नियोजकों को 2 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान

कारखाना अधिनियम-1948 यह प्रावधानित करता है कि ऐसा कोई भी परिसर, जहां 20 या अधिक श्रमिक विद्युत शक्ति के साथ अथवा बिना विद्युत शक्ति के विनिर्माण कार्य में नियोजित हैं, उस संस्थान को मुख्य कारखाना निरीक्षक से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन) अधिनियम-1996 के तहत नियोजक का यह दायित्व है कि वह किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व इसकी सूचना अनिवार्य रूप से श्रम विभाग को उपलब्ध कराए।

संस्थानों का पंजीकरण न कराने वाले नियोजकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का भी कड़ा प्रावधान है, जिसके तहत कारखानों के मामले में अधिकतम 1 लाख रुपये का जुर्माना अथवा 2 वर्ष तक का कारावास या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

इसी प्रकार, निर्माण स्थलों का पंजीकरण नहीं कराए जाने पर 2 हजार रुपये का जुर्माना अथवा 3 माह तक का कारावास या दोनों की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने सभी नियोजकों को सचेत किया है कि वे किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपनी संस्था एवं निर्माण कार्य का पंजीकरण तत्काल सुनिश्चित करें।