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Bhopal/Harda/khargon: ‘हद कर दी आपने’ मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव ने की 1.90 करोड़ की गड़बड़ी ,जांच में दोषी पाए गए, जाने कोन है ये भ्रष्ट अधिकारी

तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर आए थे,29 जनवरी को हुए आदेश

खरगोन की रवि जिनिंग उद्योग की अनुज्ञप्ति मार्च 2017 में समाप्त हो जाने के बाद कूटरचित दस्तावेजों के साथ अनुज्ञप्ति 01 अप्रेल 17 से 31 मार्च 22 तक के लिए नवीनीकरण करने का प्रयास किया। जिसकी पुष्टि सचिव द्वारा 18 मार्च 18 को जारी आदेश से हुई,जिसमें स्वयं अनुज्ञप्ति निरस्त हो जाना बताया गया। इससे साफ है कि वे इससे पहले की अवधि में लाइसेंस जीवित मान रहे थे। मंडी बोर्ड ने विभागीय जांच कराई। जिसमें सचिव श्रीवास्तव यह साबित नहीं कर पाए कि मंडी निधिसे किसानों को भुगतान करने की ऐसी आक्रोश की स्थिति बनी थी। केवल ज्ञापन को आधार बताया।रवि जीनिंग ने एक्सिस बैंक शाखा खरगोन को अपने पत्र 28मार्च 18 से बताया कि खाता नंबर 912030066755084 में जमा होने वाली राशि

को जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या. शाखा के नंबर 660044002971 में जमा करें।जिससे फर्म व सचिव के बीच सांठगांठ लगती है।

हरदा. जिले की सबसे बड़ी आदर्श कृषि उपज मंडी हरदा में दूसरी बार लंबे समय से पदस्थ सचिव संजीव श्रीवास्तव को खरगोन मंडी में पदस्थ रहने के दौरान की गई करीब दो करोड़ रुपए की आर्थिक गड़बड़ी में दोषी पाए जाने पर मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक श्रीमन शुक्ल ने पद से हटाने के आदेश जारी किए हैं।वे तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर मंडी बोर्ड की सेवाओं में आए थे। आदेश की प्रति तिलहन संघ के आयुक्त तथा राज्य सरकार को भेजने को भी कहा है। इधर श्रीवास्तव की जगह किसी अन्य व्यक्ति की पदस्थापना की कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।मालूम हो, एक प्रमुख दैनिक अखबार द्वारा इन्हें विशेष व्यक्ति के रूप सम्मानित किया गया था। पूर्व में ये हरदा मंडी में पदस्थ रह चुके हैं। विपक्ष द्वारा इनकी कार्यशैली की शिकायतें की जा चुकी हैं।

यह है मामला:

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खरगोन की रवि जिनिंग उदयोग का लाइसेंस 31 मार्च 17 को समाप्त हुई। फिर भी फर्म मंडी में खरीदी करती रही। 13 मार्च 18 से 10. अप्रैल 18 तक किसानों से की गई खरीदी का पेमेंट नहीं किया। इसके बाद सचेत करने पर 24 मार्च 18 को खरीदी बंद करने का आदेश जारी किया।व्यापारी संघ द्वारा पेश संयुक्त एफडी राजसात करने बैंक मैनेजर को पत्र लिखा।बैंक प्रबंधक हस्ताक्षर मिलान न होने से एफडी राजसात नहीं हो सकी। तब मंडी समिति निधि से किसानों को भुगतान किया। नियमानुसार खरीददार से विक्रेता को भुगतान कराना मंडी की जिम्मेदारी है।मंडी समिति मंडी निधि से भुगतान के लिए सक्षम नहीं है। धारा 39 के अतंर्गत विकेता को उनकी कृषि उपज का बकाया मंडी समिति निधि से दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। धारा 39(9) में राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के अध्यधीन रहते हुए कोई अन्य प्रयोजन, जिस पर मंडी समिति निधि से किए जाने वाला खर्च लोकहित में हो, करने के उपबंध है। इस मामले में मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव ने मंडी समिति निधि से 1,89,98,467 रुपए का गैर कानूनी तरीके से विक्रेताओं के खाते में जमा कराए। जिसकी सूचना किसी वरिष्ठ कार्यालय को नहीं दी।

यह है जांच निष्कर्ष:

जांच में कहा कि संजीव श्रीवास्तव खरगोन में पदीय दायित्व के निर्वहन में घोर कदाचरण व संदिग्ध निष्ठा के रहे। मंडी प्रांगण में हो रहे अवैध संव्यवहार को नहीं रोक पाए। इसके विपरित एक्ट व निर्देशों के विपरित मंडी निधि का दुरूपयोग कर कर 1,89,98,467 रुपए का अपने स्तर पर अनाधिकृत रूप से भुगतान किया। जिसके लिए वे दोषी हैं। जांच के आधार पर संजीव श्रीवास्तव सचिव के विरुद्ध उक्त घोर कदाचरण के लिए मप्र. राज्य मण्डी बोर्ड सेवा विनियम, 1998 के विनियम 30 (6) अन्तर्गत, म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड की सेवा से पदच्युत किया जाता है, जो सामान्यतः भावी नियोजन के लिए अनर्हत माना जाएगा। एमडी ने आदेश की कॉपी अपर संचालक,आयुक्त सहकारिता व पैतृक संस्था परिमापक, तिहलन संघ उत्पादक संघ को भी प्रति भेजने को कहा है

 

 

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