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एम्स भोपाल से मातृ मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों की पहचान, बिना किसी झंझट के फ्री पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी

भोपाल। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) की स्थिति को सुधारने और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों के वास्तविक कारणों की पहचान के लिए एम्स भोपाल में अब मातृ मृत्यु के मामलों में मुफ्त पैथोलॉजिकल (क्लिनिकल) ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह सेवा उन परिवारों के लिए मददगार साबित होगी जो अपनी प्रियजन की असामयिक मृत्यु के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना चाहते हैं।

खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पुलिस हस्तक्षेप से मुक्त है और पूरी तरह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न की जाती है। आमतौर पर ऑटोप्सी या पोस्टमार्टम का नाम आते ही पुलिस और कानूनी कार्यवाही का विचार आता है, लेकिन एम्स की यह सुविधा इससे पूरी तरह अलग है। यह एक क्लिनिकल ऑटोप्सी है, जो केवल परिवार के लिखित अनुरोध और सहमति पर की जाती है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा विज्ञान की मदद से मृत्यु के उन कारणों को खोजना है, जो सामान्य जांच में स्पष्ट नहीं हो पाते।

एम्स प्रबंधन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया लगभग डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है। विशेषज्ञों द्वारा केवल जांच के लिए आवश्यक सूक्ष्म ऊतक ही लिए जाते हैं और सभी अंगों को पुनः शरीर में सुरक्षित स्थापित कर दिया जाता है। चेहरे को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाती और शरीर को टांकों से सुरक्षित कर ससम्मान परिवार को सौंपा जाता है।

इसलिए जरूरी है जांच

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हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट के जरिए परिवार को पता चलता है कि मृत्यु के वास्तविक कारण क्या थे।

इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन सी मौतें रोकी जा सकती थीं।
प्रमाणिक डेटा के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यक सुधार किए जा सकेंगे।

इनका कहना है…
मातृ मृत्यु के मामलों को कम करना हमारी प्राथमिकता है। पैथोलाजिकल आटोप्सी के माध्यम से हम मृत्यु के उन सूक्ष्म कारणों तक पहुंच सकते हैं, जो भविष्य में अन्य महिलाओं की जान बचाने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में मदद करेंगे।

– प्रो. डा. माधवानन्द कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।