भोपाल। किसानों को खाद लेने के लिए कालाबाजारी का सामना ना करना पड़ा, इसके लिए सरकार किसानों की डिटेल डिजिटल कर रही है. इसी क्रम में अब अगर किसानों के लिए ई-टोकन अनिवार्य कर दिया है। अब जिन किसानों के पास ई-टोकन नहीं होगा, उन किसानों को खाद के लिए काफी परेशानियों का सामना कर पड़ सकता है।
सोसायटी, बाजार और गोदाम…कहीं नहीं मिलेगा खाद
किसानों को एग्री ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने की लगातार अपील की जा रही है। ऐसे किसान जो किसान निधि से जुड़े हैं, उनका डिजिटल किया जा रहा है। ऑनलाइन की किसानों की डिटेल रजिस्टर्ड की जाएगी। इसमें किसानों की जमीन की डिटेल भी शामिल होगी। अगर किसान निधि से लिंक किसान डिजिटिली कनेक्ट नहीं होते हैं। उन्हें खाद मिलने में काफी परेशानी हो सकती है. ऐसे किसानों को सोसायटी, बाजार और गोदाम कहीं भी खाद नहीं मिल पाएगा।
अब दूसरे के नाम पर नहीं मिल पाएगी खाद
अक्सर देखा गया है कि किसानों को बुवाई के सीजन में खाद के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीजन में खाद की कालाबाजारी की जाती है। किसानों को यूरिया खाद की बोरी के लिए 500 रुपये तक देने पड़ जाते हैं। लेकिन ऑनलाइन रजिस्टर होने के बाद प्रशासन का दावा है कि खाद की कालाबाजारी पर रोक लग सकेगी। अब तक देखा गया है कि एक व्यक्ति के बदले में दूसरा या तीसरा व्यक्ति खाद ले लिया करता था।लेकिन अब ऑनलाइन लिंक होने के बाद किसानों की पूरी डिटेल मौजूद रहेगी। इसमें ये भी शामिल होगा कि किसान ने कब और कितना खाद लिया है। सिर्फ एक क्लिक पर किसानों की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी। बता दें किसानों को खाद के लिए किसी परेशानी का सामना ना करना पड़ा, इसके लिए एक हजार मीट्रिक टन रैक आई है।
60 फीसदी से ज्यादा एग्री स्टैप से जुड़े
बता दें कि किसान निधि से अब तक लगभग 2 लाख किसान जुड़ चुके हैं। इनमें 60 फीसदी से ज्यादा किसान ऐसे हैं, जो पंजीयन किसान फार्मर आइडी और एग्री स्टैप से जुड़ चुके हैं। ऐसे किसानों को ई सिस्टम प्रणाली के तहत ही खाद का वितरण किया जाएगा।

