ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल फिर गरमाया
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। गुरुवार 11 सितंबर को ब्रेंट क्रूड का भाव 108.07 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। इस साल 25 मई के बाद यह पहला मौका है जब ब्रेंट इस ऊंचे स्तर पर पहुंचा है। अमेरिकी क्रूड WTI भी उछलकर 102.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
तेजी के पीछे 3 बड़े कारण
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता टकराव
कच्चे तेल में तेजी की सबसे बड़ी वजह भू-राजनीतिक तनाव है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल हमले किए हैं। इससे मध्य-पूर्व में हालात बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों के बाद ही थमेगा, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सऊदी अरब में उत्पादन में गिरावट
हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद सऊदी अरब में कच्चे तेल का उत्पादन इस साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। विद्रोहियों ने सऊदी के पश्चिमी बंदरगाहों से गुजरने वाले ऑयल टैंकरों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
चीन की खरीदारी तेज
दुनिया के सबसे बड़े क्रूड इंपोर्टर चीन ने एक बार फिर खरीदारी बढ़ा दी है। चीन की मांग बढ़ने से भी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
भारत पर क्या होगा असर….?
कच्चे तेल की यह तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का इम्पोर्ट बिल सीधे बढ़ेगा।
अगर कीमतें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रहीं, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं। इसका असर सीएनजी और पीएनजी के दामों पर भी पड़ सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ बढ़ेगा।

