‘ममलेश्वर लोक’ प्रोजेक्ट से जनता नाराज; तीर्थ का विकास श्रद्धा से हो, उजाड़ से नहीं – संत मंडल अध्यक्ष त्यागी
ओंकारेश्वर। मां नर्मदा के तट पर बसी ओंकारेश्वर तीर्थनगरी, जो अब तक अपनी भक्ति, संत-परंपरा और आध्यात्मिकता के लिए जानी जाती रही है, इन दिनों एक अलग कारण से सुर्खियों में है। यहां “ममलेश्वर लोक” 120 करोड़ की परियोजना को लेकर ब्रह्मपुरी बस्ती के सैकड़ों परिवारों में चिंता और असंतोष है। लोगों का कहना है कि अगर यह योजना मौजूदा रूप में लागू हुई तो सैकड़ों घर, दुकानें, आश्रम और धर्मशालाएं उजड़ जाएंगी।
जहां शिव विराजते, वहां उजाड़ क्यों?- यह केवल कुछ घरों की बात नहीं, बल्कि धर्म, परंपरा और आजीविका के सह-अस्तित्व की कहानी है। यह वही बस्ती है जहां हर सुबह आरती की ध्वनि से दिन की शुरुआत होती है, और हर शाम साधु-संतों के सत्संग से वातावरण गूंजता है।
संत समाज और जनप्रतिनिधियों की अपील
विवाद बढ़ने पर ओंकारेश्वर के विधायक नारायण पटेल, संत समाज और स्थानीय प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन से मुलाक़ात कर परियोजना का स्थान बदलने की मांग रखी। विधायक पटेल एवं ओंकारेश्वर षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी जी महाराज ने बताया – मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि किसी का अहित नहीं होगा। मुख्य सचिव को इस विषय पर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।” नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष वर्मा और पार्षद दिनेश पेंटर ने कहा कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ का नहीं, बल्कि जनभावना की रक्षा का है। जो बस्ती भगवान शिव की छाया में बसती है, उसे उजाड़कर कोई ‘लोक’ नहीं बस सकता,”।

