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इंदौर में किसानों का अर्धनग्न प्रदर्शन…इंदौर–मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट का जताया विरोध

इंदौर। प्रस्तावित पूर्वी रिंग रोड परियोजना और इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन के विरोध में किसानों ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी और आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन पर उनकी बात अनसुनी करने का आरोप भी लगाया।

प्रदर्शन के दौरान तेज धूप और उमस के कारण एक बुजुर्ग किसान की तबीयत अचानक खराब हो गई और वे वहीं जमीन पर लेट गए। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें पानी देने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने सरकारी पानी लेने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि वे सरकार से किसी प्रकार की सुविधा स्वीकार नहीं करेंगे और अपना पानी स्वयं लेकर आए हैं। इस घटना ने प्रदर्शन की गंभीरता और किसानों के आक्रोश को और उजागर कर दिया।

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किसानों की प्रमुख मांग है कि पूर्वी रिंग रोड परियोजना को निरस्त किया जाए। उनका तर्क है कि शहर के पूर्वी हिस्से में पहले से ही वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं, ऐसे में नई सड़क के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण अनावश्यक है। किसानों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन छीनी जा रही है, जिससे वे आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित होंगे।

किसानों ने सुझाव दिया है कि यदि सड़क और रेलवे लाइन का निर्माण अनिवार्य हो, तो इसका मार्ग वर्तमान प्रस्तावित अलाइनमेंट से 5 से 6 किलोमीटर दूर तय किया जाए, ताकि उनकी जमीनें बच सकें। साथ ही जिन किसानों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें मौजूदा बाजार दर से कम से कम चार गुना मुआवजा एकमुश्त दिया जाए। उनका यह भी कहना है कि सभी प्रभावित किसानों को समान दर से बढ़ा हुआ मुआवजा मिले और कृषि भूमि की गाइडलाइन दरों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप संशोधित किया जाए।

आंदोलन आगे भी जारी रखने की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना मजबूरी है। प्रदर्शन ने प्रशासन के सामने परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पहले व्यापक संवाद और समाधान की आवश्यकता को रेखांकित किया है।