चांदीपुर। भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के तट पर इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (आईएडीडब्ल्यूएस) का पहला परीक्षण किया। यह एक मल्टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसमें सभी स्वदेशी क्विक एक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल, एडवांस्ड वैरी शॉर्ट एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलें और हाई पावर लेजर बेस्ड डायरेक्टेड एनर्जी वेपन शामिल किए गए हैं।
यह परीक्षण शनिवार को किया गया। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी। उन्होंने लिखा- इस परीक्षण ने हमारे देश की मल्टी लेयर एयर डिफेंस कैपेबिलिटी बढ़ाई है। यह सिस्टम दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ रीजनल डिफेंस को मजबूती देगा। आईएडीडब्ल्यूएस सुदर्शन चक्र मिशन का एक हिस्सा माना जा रहा है। यह स्वॉर्म ड्रोन अटैक के खिलाफ रक्षा कवच का काम करेगा। पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में सुदर्शन चक्र मिशन की घोषणा की थी।
परीक्षण के दौरान इस सिस्टम ने दो हाई स्पीड फिक्स विंग अनमैन्ड ड्रोन, मल्टी कॉप्टर ड्रोन समेत तीन अलग-अलग टारगेट पर अटैक किया। ये तीनों टारगेट अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर थे। आईएडीडब्ल्यूएस ने इन तीनों को एक साथ निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया। सिस्टम का कॉन्सेप्ट इस तरह से तैयार किया गया कि पहले रडार यूनिट आने वाले खतरों पर नजर रखती है और उन्हें क्लासिफाई करती है। इसके बाद कमांड सेंटर ज्यादा ऊंचाई से आने वाले खतरों के लिए क्विक एक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल को निर्देश देता है। कम रेंज वाले और धीमी गति से होने वाले हमले के लिए एडवांस्ड वैरी शॉर्ट एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलें सक्रिय होती हैं। इसके साथ ही साथ ड्रोन और चीप सैचुरेटेड अटैक के लिए लेजर बेस्ड डायरेक्टेड एनर्जी वेपन हमला करते हैं। इस सिस्टम के सफल परीक्षण से भारत की इग्ला और सीआईडब्ल्यूएस जैसे विदेशी डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता कम हो जाएगी।

