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खातेगांव : जाति का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से नहीं मिल रहा है शासन की योजनाओं का लाभ

खातेगांव। तहसील की ग्राम पंचायत सागोनिया के अंतर्गत ग्राम भीमताल में 153 परिवारों के 923 लोग इन दिनो जातिगत पहचान से जूझ रहे हैं। जाति का स्पष्ट उल्लेख न होने से  शासन की योजनाओं के लाभ से वंचित है। जाति प्रमाण पत्र न बनने से उनके बच्चों का भविष्य भी अधर में हे। यह लोग इस गांव में कई वर्षों से रह रहे हैं लेकिन ग्राम पंचायत के पास आज भी उनकी जाति का स्पष्ट प्रमाण नहीं है। इस कारण उनकी जाति के प्रमाण पत्र नहीं बन पाए हैं।

जानकारी के अनुसार सागोनिया ग्राम पंचायत के भीमताल के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण कई पालकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक हमारी जाति का निराकरण नहीं होता हम हमारे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे क्योंकि कक्षा पांचवी पास  करने के बाद कक्षा छठी में जाति प्रमाण पत्र के अभाव में  माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश दिया नही दिया जाता है ।वही होस्टल और छात्रवृत्ति जैसी परेशानी से भी बच्चे जूझ रहे हैं क्योंकि उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है । शासकीय छात्रावासो में भी जाति प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण प्रवेश से वंचित होना पड़ रहा है। क्योंकि ग्राम पंचायत सागोनिया के पास उनकी जाति का कोई स्पष्ट प्रमाण आज भी नहीं है। क्योंकि ग्राम पंचायत इन्हें किस जाति का माने इस कारण इनके प्रमाण पत्र आज तक नहीं बन पाए हैं।

आखिर यह विरोधाभास क्यों?

खातेगांव अनुभाग में भटोला समाज को आखिर अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी क्यों नहीं किया जा रहा है। जबकि दूसरी ओर देवास जिले की बागली तहसील के ग्राम धनतालाव के मनोहर भटोला पिता अंबाराम भटोला का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया गया हे। यह जाति संविधान के अनुच्छेद 342 के अधीन मध्य प्रदेश राज्य अधिसूचित अनुसूचित जनजाति की सूची में अनुक्रमांक 16 पर निम्नलिखित के तहत विशिष्ट की गई है ।उसी के तहत प्रकरण क्रमांक 2448 बी 121 जाति प्रमाण पत्र पत्र क्रमांक आर एस 437/0104/ 27 – 28 /2018 दिनांक 9- 6 2018 को तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी रानी बंसल द्वारा जारी किया गया है।

यह भटोला जाति के ही लोग हैं

भटोला जाति के तहत अपना जीवन यापन करने वाले यह लोग पहले पत्थर से बनी घट्टी बेचते थे। इस कारण इने घट्टाया कहा जाता था बाद में यह लोग इन घटियों को टाकने का काम करने लगे तो इन्हें टाकिया कहा जाने लगा मूलत यह भटोला जाति के लोग हैं जो कहीं पीडियो से सागोनिया कालीबाई भीमताल व विक्रमपुर गांव में निवास कर रही हे।

जाति प्रमाण के लिए भटकते हैं भटोला समाज के लोग

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मध्य प्रदेश के रायसेन खंडवा होशंगाबाद सहित आधा दर्जन जिलों में भटोला जाति को अनुसूचित जनजाति में ही शामिल किया गया है। और बाकायदा प्रमाण पत्र भी जारी किए गए, लेकिन मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगांव अनुभाग में इने अनुसूचित जनजाति मे  नहीं माना जा रहा जिसके कारण उनके बच्चों को शासन से मिलने वाली सुविधाएं जैसे छात्रवृत्ति हॉस्टलों में प्रवेश तथा अन्य लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। भटोला समाज के लोगों को किसी भी जाति में शामिल नहीं किया जा रहा है इस कारण इनका जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाया है यह लोग अभी भी बगैर जाति के निवास कर रहे है।

इनका कहना हे

हमने अनुसूचित जाति जनजाति  प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखी है। देखना यह है कि कब तक हमें अपनी जाति के प्रमाण पत्र मिल पाते हैं।

“नेरू भटोल”, भीमताल

इनका कहना हे।

सागोनिया ग्राम पंचायत के भीमताल के ग्रामीणों ने अनुसूचित जाति जनजाति प्रमाण पत्र  जारी होने के संबंध में आवेदन दिया है आवेदन वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दिया जायेगा

“अवधेश यादव”,  तहसीलदार खातेगांव