छोटी दुकान हो या बड़ा कारोबार—क्या हर दुकान के पास है कमर्शियल कनेक्शन? कहीं एक के मीटर से दूसरा दुकानदार तो नहीं कर रहा कारोबार?
हंडिया। क्षेत्र में छोटी-बड़ी दुकानें और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। दुकानों में बिजली का उपयोग भी हो रहा है, लेकिन अब एक सीधा सवाल खड़ा हो रहा है—क्या हंडिया की हर दुकान के पास नियमानुसार कमर्शियल विद्युत कनेक्शन है?
सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुकान चाहे छोटी हो या बड़ी, वहां व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है। ऐसे में विद्युत कनेक्शन की श्रेणी और वास्तविक उपयोग की स्थिति की जांच होना जरूरी है। इसका सही जवाब विद्युत विभाग के रिकॉर्ड और मौके पर निरीक्षण से ही सामने आ सकता है।
एक का कनेक्शन, दूसरे की दुकान… और महीने का हिसाब?
मामला केवल कमर्शियल कनेक्शन तक सीमित नहीं है। हंडिया में कुछ स्थानों को लेकर ऐसी जानकारी है कि जिस दुकानदार के नाम पर विद्युत कनेक्शन है, उसी कनेक्शन से दूसरे दुकानदार को भी बिजली उपलब्ध कराई जाती है और इसके बदले मासिक राशि लिए जाने की बात कही जा रही है।
अब सवाल यह है कि यदि ऐसा हो रहा है तो क्या किसी उपभोक्ता को अपने विद्युत कनेक्शन से दूसरे परिसर या दुकान को बिजली उपलब्ध कराने और उसके बदले राशि लेने की अनुमति है?
यह किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि विद्युत विभाग के लिए जांच का विषय है। विभाग मौके पर जांच करे तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
जांच में पांच सवालों के जवाब काफी हैं
विद्युत विभाग यदि हंडिया में दुकानों का निरीक्षण करता है तो कई सवालों का जवाब एक साथ मिल सकता है—
दुकान में लगा कनेक्शन घरेलू है या कमर्शियल?
कनेक्शन वास्तव में किसके नाम पर है?
मीटर जिस परिसर के नाम पर है, बिजली वहीं उपयोग हो रही है या कहीं और भी?
क्या एक कनेक्शन से दूसरे दुकानदार या परिसर को बिजली दी जा रही है?
यदि बिजली दूसरे दुकानदार को दी जा रही है तो क्या उसके बदले मासिक राशि ली जा रही है?
रिकॉर्ड से लेकर मौके तक हो जांच
हंडिया में बिजली विभाग चाहे तो उपभोक्ता रिकॉर्ड के साथ मौके की स्थिति का मिलान कर वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है। सिर्फ बिल जारी होना पर्याप्त नहीं, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि कनेक्शन जिस उद्देश्य और श्रेणी में लिया गया है, उसका उपयोग उसी अनुरूप हो रहा है या नहीं।
यदि जांच में सब कुछ नियमानुसार मिलता है तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं यदि कहीं घरेलू कनेक्शन से व्यावसायिक उपयोग, गलत श्रेणी का कनेक्शन अथवा एक कनेक्शन से दूसरे परिसर को बिजली देने जैसी स्थिति मिलती है तो विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
सहायक प्रबंधक से फोन पर पक्ष जानने का प्रयास
मामले में विद्युत विभाग का पक्ष जानने के लिए सहायक प्रबंधक पवन बारस्कर से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।
सवाल छोटा है, जवाब विभाग के पास है
मामला किसी एक दुकानदार को निशाना बनाने का नहीं है। सवाल सिर्फ इतना है कि हंडिया की छोटी-बड़ी दुकानों में बिजली किस श्रेणी के कनेक्शन से पहुंच रही है?
और अगर कहीं सचमुच “एक का मीटर, दूसरे की दुकान और हर महीने का हिसाब” चल रहा है, तो फिर यह व्यवस्था किस नियम के तहत चल रही है—इसका जवाब विद्युत विभाग की जांच से मिलना चाहिए।
अब देखना यह है कि हंडिया की दुकानों में जल रही बिजली का सिर्फ बिल देखा जाएगा या कनेक्शन की श्रेणी और वास्तविक उपयोग की भी जांच होगी।

