इंडिया नाम भारत को अंग्रेजों ने दिया और 190 वर्ष भारत को गुलाम बनाकर रखा
दिल्ली: नरेन्द्र मोदी विचार मंच के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव सूरज ब्रम्हे ने देश में इंडिया शब्द पर छिड़ी बहस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुवे कहा की इंडिया शब्द भारत वासियों को गुलामी का अहसास कराता है। इंडिया शब्द को भारत से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर देना चाहिए। सन 1757 से 1947 तक अंग्रेजों ने भारत के साथ छल – कपट करके भारत को 190 वर्ष तक गुलामी की जंजीरों में जकड़ रखा था। इन वर्षों में भारत की संस्कृति और सभ्यता को चूर – चूर कर दिया। जब अंग्रेज भारत में व्यापार करने के बहाने आए तो भारत की सभ्यता सिंधु घाटी है जिसे अंग्रेज इंडस वैली कहते थे। इस शब्द को लैटिन भाषा में इंडिया कहा जाता था। तब से अंग्रेजों ने भारत को इंडिया कहना शुरू किया। वैसे भारत को जम्बूद्वीप , भारतखंड, हिमवर्ष, अजनावर्ष , आर्यावर्त , हिन्द, और हिंदुस्तान के नाम से भी जाना जाता है। श्री ब्रम्हे ने बताया की हिन्दू पुराणों , स्कंद पुराणों के अनुसार भारत का नाम नाभीराज के पुत्र ऋषभदेव और ऋषभदेव के पुत्र चक्रवर्ती महाराजा भरत के नाम पर भारतवर्ष रखा गया।
मध्यकाल में जब तुर्क और ईरानी भारत आए तो वे सिंधु से प्रवेश किया जो “स” का उच्चारण “ह” करते थे। और इस तरह से सिंधु को हिन्दू कहने लगे और इस देश के वासियों को हिंदुओं का नाम दिया और हिंदुओं के देश को हिंदुस्तान नाम दिया गया। इसी तरह भारत को जम्बूद्वीप के नाम से भी जाना जाता था। संस्कृत भाषा में जम्बूद्वीप बहुत बड़े क्षेत्रफल को कहा जाता है साथ ही इस देश में जम्बू के पेड़ अधिक मात्रा में होने के कारण चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व इस देश को जम्बूद्वीप नाम दिया था। इस तरह भारत सानातनियों का देश था है और रहेगा। उस समय भारत ने सनातन को मानने वाले लोग ही इस देश में निवास करते थे। सनातन जिसका कभी अंत नही जो अनंत हैं वही सनातन है। जब तक पृथ्वी रहेगी , जब तक सूरज – चांद रहेगा तब तक सनातन रहेगा और सनातन को मानने वाले रहेगें।
श्री ब्रम्हे ने कहा की जो कानून अंग्रेजों ने बनाया था आज भी वही कानून चल रहें हैं। जिस तरह अनुच्छेद 348 (1)(A) के अंतर्गत मा.सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में फैसला अंग्रेजी भाषा में लिखी जाती है। इसी तरह लोक सभा और राज्य सभा में जो निर्णय ( फैसला ) होते हैं वो भी अंग्रेजी भाषा में लिखे जाते हैं। भारत एक ऐसा देश हैं जहां भारत के अहम फैसले को अपनी मात्र भाषा हिन्दी में ना लिखकर अंग्रेजी में लिखे जाते हैं। ये अंग्रेजों के बनाए हुवे कानून है। जिसमे संशोधन होना चाहिए। भारत में अंग्रेजी भाषा पर प्रतिबंध होना चाहिए और शासकीय सभी कार्यवाही हिन्दी भाषा में किया जाना चाहिए। नरेंद्र मोदी विचार मंच के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव सूरज ब्रम्हे ने महामहिम राष्ट्रपति जी , मा .प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी, एवम दोनो सदनों के सम्माननीय सदस्यों से मांग की है की संसद का विशेष सत्र बुलवाकर दोनो सदनों में प्रस्ताव पारित कर अनुच्छेद 348 (1) (A) में संशोधन करते हुवे सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय एवम देश के दोनों सर्वोच्च सदनों में फैसले या जो निर्णय होते हैं उन्हें अंग्रेजी भाषा में ना लिखते हुवे देश की मातृ भाषा हिन्दी में लिखा जाना अनिवार्य किया जाए।