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कोरोना वायरस के नये वैरिएंट ने बढ़ाई चिंता, बढ़ने लगे मामले, जानिए किनको है ज्यादा खतरा

Coronavirus in India: देश में एक बार फिर कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। बुधवार को संक्रमण के 1134 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जो मंगलवार की तुलना में अधिक हैं। इसके साथ ही एक्टिव मरीजों का आंकड़ा भी 7 हजार के पार पहुंच गया है। इनमें सबसे ज्यादा मामले केरल से हैं, जहां 1921 मामले दर्ज किये गये हैं। चिंता की बात यह है कि अब कोरोना की संक्रमण दर ( पॉजिटिविटी रेट) भी बढ़ रही है। तीन राज्यों में ये पांच फीसदी के पार पहुंच गई है। आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 5 प्रतिशत से ज्यादा की संक्रमण दर कोविड के तेजी से फैलने की ओर इशारा करती है और इसे रोकने के लिए कदम उठाना शुरु कर देना चाहिए।

इन राज्यों में बढ़े मामले

केरल के अलावा हिमाचल प्रदेश, गोवा और देश की राजधानी दिल्ली में कोविड की संक्रमण दर 5 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। इन तीनों ही राज्यों में पॉजिटिविटी रेट बीते चार दिनों से लगातार बढ़ रहा है। बता दें कि एक सप्ताह पहले तक यह दर केवल 2 फीसदी थी। केरल में ज्यादा केस इसलिए आते हैं क्योंकि वहां टेस्टिंग ज्यादा है और देशभर से लाखों लोग और विदेशी भी घूमने जाते हैं। पिछले तीन सालों में कोविड के पैटर्न में एक बात कॉमन है कि केरल से ही कोविड के केस बढ़ने की शुरुआत होती है. केरल में कोरोना को लेकर अच्छी ट्रेसिंग होती है. वहां टेस्ट भी अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा किए जाते हैं. इस वजह से अधिक केस रिपोर्ट होते हैं.

क्यों बढ़ रहे हैं मामले?

डॉक्टरों के मुताबिक भारत में कोविड एंडेमिक फेज में है और मौसम में बदलाव की वजह से वायरस एक्टिव हुआ है। इस मौसम में वायरस के एक्टिव होने की वजह से ऐसा हो रहा है. लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं. ऐसे में वायरस को पनपने का मौका मिल रहा है. लेकिन किसी नई लहर का खतरा नहीं है। कोविड अब केवल एक फ्लू की तरह ही बन गया है. अभी कुछ दिनों तक देश में कोविड के केस बढ़ सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि फ्लू भी फैल रहा है और लोगों को खांसी-जुकाम की शिकायत हो रही है. लोग कोविड टेस्ट भी करा रहे हैं, जिसमें कुछ केस पॉजिटिव मिल रहे हैं.

नये वैरिएंट का असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से देश में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि के पीछे कोविड-19 का XBB 1.16 वैरिएंट है। यह कोविड-19 के ओमिक्रॉन वैरिएंट के रिकॉम्बिनेशन XBB वैरिएंट का सब-टाइप है जो देश में तेजी से फैल रहा है। सबसे पहले जनवरी 2023 की शुरुआत में XBB1.16 की पहचान की गई थी। उसके बाद यह वैरिएंट अमेरिका, ब्रुनेई, सिंगापुर, चीन और यूके समेत कम से कम 12 देशों में पाया गया है, जिसमें से सबसे अधिक मामले भारत में पाए गए हैं। INSACOG के नए आंकड़ों के अनुसार, देश में XBB1.16 के अब तक 76 मामले सामने आए हैं।

कितना खतरनाक है XBB.1.16?

वैश्विक स्तर पर XBB.1.16 के बारे में चिंताएं हैं क्योंकि इस सब-वैरिएंट में वायरस में कुछ म्यूटेशन हुआ है जो इम्यूनिटी को प्रभावित करता है। वायरस का यह वैरिएंट पिछले वैरिएंट (XBB.1.5) की अपेक्षा 140 प्रतिशत तेजी से वृद्धि करता है जो इसे और अधिक आक्रामक बनाता है। इस वैरिएंट में तीन अतिरिक्त स्पाइक म्यूटेशन हुए हैं, जिन्हें हाल ही में पहचाना गया है। माना जा रहा है कि मजबूत इम्युनिटी से इसे हराया जा सकता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं नहीं हुआ तो पूरी दुनिया को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इसकी निगरानी करना और इसके प्रसार को रोकना जरुरी है।

XBB 1.16 के लक्षण और गंभीर स्थिति

इस नए कोविड वैरिएंट XBB 1.16 का कोई अलग लक्षण नहीं बताया गया है। कोविड के पुराने लक्षण जैसे सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, गले में खराश, नाक बहना और खांसी आदि इस वैरिएंट के भी लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को पेट दर्द और बेचैनी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है। सांस की तकलीफ या लगातार बुखार आ रहा हो, तो फौरन डॉक्टर से मिलें। अगर रेस्पिरेटरी रेट 24 प्रति मिनट से अधिक है और एसपीओ2 (ऑक्सीजन लेवल) 90 से नीचे जाए, मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है। वहीं अगर रेस्पिरेटरी रेट प्रति मिनट 30 से अधिक है तो उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ सकता है।

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किनको है ज्यादा खतरा?

एम्स/आईसीएमआर कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स/जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप द्वारा जारी की गई सूची में 8 तरह के लोगों को कोविड के इस वैरिएंट का खतरा अधिक है। इनमें ये वैरिएंटगंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है या उनके लिए मौत की वजह भी बन सकता है।

    • वृद्ध या 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग,
    • जिन्हें हृदय रोग और कोरोनरी धमनी रोग हो
    • डायबिटीज के मरीज या एचआईवी पॉजिटिव लोग
    • जिन्हें फेफड़े, किडनी या लीवर की पुरानी बीमारी हो
    • सेरेब्रोवास्कुलर रोग से पीड़ित लोग,
    • मोटापे से ग्रसित लोग, ये इम्यून सिस्टम और फेफड़ों को प्रभावित करता है,
    • ऐसे लोग जिनकी इम्युनिटी कमजोर हो या जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ हो।

कैसे करें बचाव?

डॉक्टरों के मुताबिक लोगों को कोविड से बचाव के पुराने नियमों का पालन करना चाहिए। बाहर जाते समय मास्क जरूर लगाएं और भीड़ वाले इलाकों में जानें से बचें। दूसरी ओर इन्फ्लूएंजा और कोविड भले ही अलग-अलग प्रकार के वायरस हैं, लेकिन उनके फैलने का तरीका और लक्षण एक जैसे ही हैं। इसलिए लोगों को इस समय मास्क जरूर लगाना चाहिए। ये कोविड और इन्फ्लूएंजा दोनों से बचाव करेगा। साथ ही फ्लू का टीका भी लेना चाहिए। इससे इन्फ्लूएंजा के गंभीर लक्षणों से बचाव किया जा सकता है।