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लड्डुओं से भी अधिक मोदक प्रिय है गणेश भगवान को – ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री

भगवान् श्री गणेश जी की कथाएँ हों या उनकी आरती, भोग स्वरूप लड्डुओं का गुणगान किया गया है किंतु क्या आप जानते हैं कि खाने के शौक़ीन गणेश जी को लड्डुओं से भी अधिक मोदक प्रिय है। जी हाँ सही पढ़ा आपने गणेश जी को मोदक अत्यंत ही प्रिय है इसलिए गणेश जी को मोदक का भोग विशेष रुप से लगाए जाने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है।

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यूँ तो गणेश जी के मोदक प्रियता की कई कहानियां हैं परंतु इसके पीछे जो पुराणों में वर्णित जो सबसे अधिक प्रचलित कथा है वो आज हमें बताने जा रहे हैं ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी. तो आइए जानते हैं यह मनोहारी कथा. ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी बताते हैं, ”गणेश जी की मोदक प्रियता की कथा, उनके दांत टूटनेवाली कथा से जुडी हुई है।

दरअसल हुआ यूँ कि एक बार जब गणेश जी का एक दांत टूट गया तो उन्हें कुछ भी खाने पीने में बहुत परेशानी हो रही थी. श्री गणेश जी की इस परेशानी को देखकर माता पार्वती ने उनके लिए मोदक बनाए। जब भोजन में उन्हें मोदक खाने को दिया गया तो उसे उन्होंने बिना किसी परेशानी के अत्यंत आराम से खा लिया. सिर्फ यही नहीं उन्हें उनका स्वाद भी इतना पसंद आया कि उन्होने उसे अपने भोग के रुप में स्वीकृति प्रदान कर दी. साथ ही यह वचन भी दिया कि जो भी मुझे मोदक का भोग लगाएगा, उसकी समस्त मनोकामनाएं सहजता से पूर्ण हो जाएँगी. और तब से मोदक, भगवान श्री गणेश जी को भोग स्वरूप अर्पित किया जाने लगा. ”
ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री जी के अनुसार मोदक का स्वरूप व्यक्ति में बौद्धिकता के असीम ज्ञान को दर्शाता है। इसका तात्पर्य यह है कि इसका बाहरी आवरण स्वयं में अथाह ज्ञान को अपने भीतर लिए हुए है। अत: गणेश जी के अत्यंत मोदक को बुद्धि एवं ज्ञान के रुप में भी अर्पित किया जाता है. मोदक को ब्रह्माण्ड का प्रतीक भी माना गया है, जिसे गणेश जी धारण किए हुए हैं. ऐसे में मोदक के अनेकों रुप उसकी सार्थकता को स्वयं ही सिद्ध करते हैं।