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शीतला माता का सबसे प्राचीन मंदिर, जहां दर्शन से होती है मनोकामना पूर्ण

नवरात्रि के पहले ही दिन हजारों की संख्या में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़,

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 के के यदुवंशी

सिवनी मालवा। शीतला माता का प्राचीन मंदिर यहां सभी धर्मों के श्रद्धालु अपनी समस्या और मनोकामना निवारण के लिए माथा टेकते हैं। मां की कृपा से नि:संतान को संतान और निर्धनों को धन की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने आते हैं। नवरात्रि में प्रातः 4 बजे से दोपहर तक हजारों श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं नवरात्रि में श्रद्धालु भाव से व्रत रहते हैं और वह प्रतिदिन देवी जी के दर्शन करने निकलते हैं श्रद्धालुओं का मानना है कि देवल मोहल्ला स्थित शीतला माता मंदिर आस्था का केंद्र है शहर में प्रतिमा बिठाने वाले सभी यहीं से प्रतिमाएं ले जाते हैं और माता रानी को भेंट चलाते हैं यहां साल में दो बार नवरात्रि में भक्तों का मेला जैसा नजारा लगता है जहां हजारों की संख्या में प्रतिदिन श्रद्धालु आते हैं समिति के द्वारा यहां व्यापक स्तर पर महिलाओं पुरुषों के लिए व्यवस्था की गई है।
आस्था का केंद्र बना हुआ है। लोगों की मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए माता की आराधना करते हैं। मान्यता है कि देवी की आराधना से भक्तों की सभी मनोकामना पूरी हो जाती है। इसलिए भक्त भक्तिभाव और आस्था के साथ नवरात्रि में देवी की आराधना करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में विभिन्न उपायों के द्वारा भी भक्त अपनी मनोकामना को पूरी कर सकते हैं। लगभग ढाई सौ वर्ष पुराना यह मंदिर को नया रूप कलाकारों के द्वारा किया है जिससे यहां आने वाले श्रद्धालु प्रभावित होते हैं और घंटो माता के दर्शन करने बैठ जाते हैं प्रतिदिन यहां सुबह और शाम कीर्तन और भजन का आयोजन होता है नवरात्रि में यहां अलग से देवी प्रतिमा मिठाई जाती है और प्रतिदिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है महाआरती में यहां प्रतिदिन श्रद्धालु अपनी हाजरी लगाते हैं कहते हैं कि यहां सच्ची श्रद्धा से आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण होती है।