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हरदा : 23 मार्च से नहरों में पानी छोड़ने पर गहराया संशय, संभागीय जल उपयोगिता समिति की बैठक का दिन तय नहीं

संभागीय जल उपयोगिता समिति की बैठक का दिन तक तय नहीं, इसी में होगा निर्णय

मकड़ाई समाचार हरदा। जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग की सिंचाई के लिए 23 मार्च से नहरों में छोङे जाने वाले पानी को लेकर संशय गहरा रहा है। जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में 23 मार्च से जिले की नहरों में तवा डेम से पानी छोङने का निर्णय लिया गया था। इसका प्रस्ताव भी भेजा गया। लेकिन अब तक संभागीय जल उपयोगिता समिति की बैठक की तारीख तय नहीं हो सकी है। ऐसे में 23 मार्च से नहरों में पानी छोङने पर संशय की स्थिति बनी हुई है। वहीं किसान भी जल्द से जल्द नहरों में पानी छोङने की मांग कर रहे हैं। कार्यपालन अभियंता राकेश दीक्षित ने बताया कि तवा डेम से ग्रीष्मकालीन मूंग की सिंचाई के लिए पानी छोङने को अभी कुछ भी कह पानी मुश्किल है। नहरों में पानी छोङने का निर्णय संभागीय समिति की बैठक में लिया जाएगा। जल्द संभागीय समिति की बैठक होना संभावित है। बता दें कि जिले में कई किसान रबी सीजन की फसल कटाई के बाद मूंग की बुआई की तैयारी में जुट गए हैं। जबकि स्वयं के जल स्त्रोत वाले किसानों ने मूंग की बुआई भी शुरू कर दी है।

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35 हजार हेक्टेयर के लिए मिलेगा पानी

जल संसाधन विभाग ने जिले में सात उपनगरों में 30 हजार हेक्टेयर रकबे में नहर से मूंग की सिंचाई करने के लिए प्रस्तावित किया था। जिसमें सामरधा उपनहर से 5150 हेक्टेयर, रेवापुर उपनहर से 4650 हेक्टेयर, सोनतलाई उपनहर से 2600 हेक्टेयर, माचक खिरकिया उपनहर से 2600 हेक्टेयर, हरदा उपनहर से 6004 हेक्टेयर, अजनई उपनहर से 7158 हेक्टयर, गुरिदया उपनहर से 1838 हेक्टेयर का रकबा शामिल था। लेकिन 5 हजार हेक्टेयर बढाया गया। इसे सभी नहरों में थोङा-थोङा बढाया जाएगा।