सिंगरौली। बिजली उत्पादन और कोयला खदानों के लिए मशहूर मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला 12 सालों से एक सड़क का इंतजार कर रहा है। 400 करोड़ रुपए की लागत से सीधी जिले को सिंगरौली से जोड़ने वाली इस सड़क के लिए अब तीसरी बार टेंडर जारी हुआ है। इस सड़क के लिए कई कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा चुका है। इतना ही नहीं अब तो स्थानीय भी उम्मीद छोड़ चुके हैं कि यह सड़क बनेगी। यह वही सड़क है, जिसकी धीमी प्रगति का जिक्र खुद केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में किया था।
12 सालों से NH-39 का इंतजार
उत्तर प्रदेश के झांसी शहर को झारखंड के रांची से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 39 बनाया गया है। यह NH-39 मध्य प्रदेश के सिंगरौली से भी होकर गुजरता है, जो सीधी जिले को डायरेक्ट जोड़ता है। करीब 50 KM लंबी इस सड़क के लिए तीसरी बार टेंडर जारी हुआ है।
3 बार जारी हुआ टेंडर
इस सड़क का निर्माण साल 2009-10 में शुरू हुआ था तब टेक्नो यूनिक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को ठेका मिला था। ठेका मिलने के बाद इस कंपनी ने 5-6 साल तक काम किया, लेकिन बाद में कई सारे कारणों की वजह से कंपनी ने बीच में काम छोड़ दिया। कंपनी द्वारा काम छोड़ने के बाद 5 सालों तक कोई काम नहीं हुआ। दूसरी बार टेंडर तिरुपति बिल्डकॉन कंपनी को जारी हुआ। इस कंपनी ने 3 साल तक काम किया और फिर काम छोड़ा दिया। अब तीसरी बार इस सड़क के लिए टेंडर जारी किया गया है।
राहगीरों को होती है बेहद परेशानी
यहां कोयले की खदान होने की वजह से हमेशा बड़े-बड़े लोड वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। वहीं, हाई-वे होने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों का भी आना-जान लगा रहता है। अब सड़क नहीं होने की वजह से लोगों को भारी परेशानी होती है। साथ ही हमेशा किसी हादसे या अनहोनी का भय भी रहता है।

