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7 दिन पहले बेहाल मिले निजी अस्पताल, रिपोर्ट छिपाई, खुली तो सीएमएचओ बोले, व्यस्त थे

मकड़ाई समाचार ग्वालियर। स्वास्थ्य सेवाओं के जिम्मेदारों ने मनमानी पर उतारू निजी अस्पतालों को किस कदर लूट की छूट दे रखी है यह पिछले दिनों गुपचुप निरीक्षण में सामने आ गया। निरीक्षण 19 सितंबर को होता है, एक नहीं अगिनत अव्यवस्थाएं मिलती हैं। कोरोना जैसी आपदा में भी मरीजों के साथ खिलवाड़ होता मिला। इतना सब मिला, लेकिन खुद स्वास्थ्य विभाग ने ही इसे छिपा लिया। अब साठगांठ थी या कुछ और, यह जांच का विषय है। 7 दिन बीतने के बाद भी एक अस्पताल को नोटिस तक जारी नहीं किया गया, जब बात खुली तो हड़कंप मचा। अब सीएमएचओ डॉ. वीके गुप्ता का तर्क भी हैरानी भरा है। उनका कहना है कि समय नहीं मिला, व्यस्तताएं थीं, इसलिए नोटिस जारी नहीं किए, अब करेंगे। हकीकत यह कि मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है और साहब लोगों पर समय तक नहीं, यह गजब है।

निजी अस्पतालों की बदहाली बताती डॉक्टरों की रिपोर्ट

एसएसटी हॉस्पिटल हजीरा : 10 बेड के इस अस्पताल में सिर्फ चार बेड पड़े मिले। एक भर्ती मरीज आइसीयू में ऑक्सीजन पर था, जिसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव पर सीटी स्कैन में लंग्स में संक्रमण था। अस्पताल में एमडी मेडिसिन डॉक्टर नहीं था। केस शीट अूधरी थी, जिसमें डॉक्टर का नाम तक नहीं था। नोन मेडिको स्टाफ बिना यूनिफोर्म के मिला।

ब्रह्मानी हॉस्पिटल हजीरा : 55 साल का मरीज यहां भर्ती था, जिसे सांस संबंधी परेशानी थी। अस्पताल प्रबंधन ने कोरे कागज पर उसके हस्ताक्षर ले रखे थे। केस शीट में बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यहां एमडी मेडिसिन डॉक्टर नहीं था, स्टाफ भी बिना यूनिफोर्म व नेमप्लेट के मिला।

आरडी हॉस्पिटल मुरार : यहां 3 मरीज भर्ती थे, जिसमें एक की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव थी। शेष दो को जांच के लिए बोला गया था। तीनों मरीजों की केस शीट अधूरी थी। इसमें इलाज देने वाले डॉक्टर का नाम व डायग्नोस आदि की जानकारी नहीं लिखी थी। स्टाफ बिना यूनिफोर्म व नेम प्लेट के मिला।

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मानसरोवर केयर हॉस्पिटल मुरार : यहां 50 वर्षीय कोरोना मरीज सेवाराम दो दिन से वेटिंलेटर पर भर्ती था। इसे रॉयल इन होटल में भर्ती का आदेश अफसरों ने दिया था फिर भी इसे अस्पताल में रखे हुए थे। हॉस्पिटल प्रबंधन डिस्चार्ज की बात जरूर कर रहा था पर डेढ़ बजे तक नहीं किया था। स्टाफ भी बिना यूनिफोर्म व नेमप्लेट के मिला।

केएम हॉस्पिटल पड़ावः यहां 4 मरीज भर्ती थे, जिसमें दो की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव व दो को जांच के लिए बोला गया था। चारों मरीज की केस शीट अधूरी थी, इलाज देने वाले डॉक्टर का नाम व डायग्नोस की जानकारी नहीं थी। मरीजों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर ले रखे थे। यहां भी स्टाफ बिना यूनिफोर्म व नेमप्लेट के मिला।

यह कहा था स्वास्थ संभागायुक्त ने

दरअसल स्वास्थ संभागायुक्त ने निर्देश दिए थे कि किसी भी निजी अस्पताल को कोविड मरीज को इलाज देने के लिए सीएमएचओ से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। ऐसे में कोविड मरीज को इलाज देने से पहले अस्पतालों को कोविड शर्तों व गाइडलाइन का पालन करना होगा और मरीज की पूरी जानकारी कलेक्टर व सीएमएचओ को देनी होगी।

पांच अस्पतालों का निरीक्षण किया था, जिसमें मरीजों की केस शीट अधूरी मिलीं। साथ ही कोरे कागज पर मरीज के हस्ताक्षर ले रखे थे। कुछ अस्पताल में डॉक्टर भी नहीं मिले। यह पूरी जानकारी सीएमएचओ सौंप दी। डॉ. प्रशांत नायक, सिविल हॉस्पिटल प्रभारी

अस्पताल में डॉक्टर, नोन मेडिको स्टाफ, मरीजों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर, केस शीट अधूरी मिली। कोरोना मरीजों की जानकारी भी निजी अस्पतालों ने सीएमएचओ कार्यालय में नहीं दी थी। डॉ. प्रशांत दुबे, आयुष्मान के नोडल अधिकारी