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विनम्रता ही ऐसा भाव है जिससे जीवन सुखमय बन सकता है : सत्यदेवानंद महाराज

नीमगांव में आज किया जाएगा श्रीमद् भागवत कथा का समापन

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हरदा । नीमगांव स्थित श्रीगुरु जम्भेश्वर मंदिर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुक्रवार को छठा दिन रहा। शनिवार को पुर्णाहूति और प्रसादी वितरण के साथ कथा का समापन किया जाएगा। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी ने सभी का मन मोह लिया। शुक्रवार को कथा का वाचन करते हुए आचार्य सत्यदेवानंद महाराज ने कहा कि जीवन में सत्संग की विशेष महिमा बताई गई है। भगवान जाम्भाेजी लोगों को से एक प्रश्न करते हैं कि ऐसा वो कौन सा धर्माचरण है, जिससे मनुष्य सुखपूर्वक जीवन जी सकता है। भगवान ने कुछ नियम बताकर इस प्रश्न का उत्तर भी दिया। पहला नियम विनम्रता। विनम्रता है तो जीवन सुखमय व्यतीत हो सकता है। जैसे घांस पर बाढ़ का पानी आता है तो घांस झुक जाती है और बाद में खड़ी हो जाती है। वहीं नदी किनारे बड़े बड़े पेड़ होते हैं जो बाढ़ में बह जाते हैं। हमारी वाणी में विनम्रता हो, हम जब भोजन करें तो विनम्रता हो। हर काम में विनम्रता होनी चाहिए। भगवान श्रीराम ने रावण को युद्ध में चुनौती दी। तीसरे दिन ही रावण युद्धभूमि में आ गया।

रामजी को चुनौती दी और दोनों का युद्ध दिया। अंत में रामजी ने रावण के सारे अस्त्रों को काट दिया। रथ भी टूट गया। रावण धरती पर आ गया। रामजी ने रावण से कहा कि रावण तुम युद्ध करते करते थक गए हो जाओ कल फिर युद्ध करना। इस भाव को विनम्रता कहा जाता है। रामजी की इस विनम्रता को देखकर रावण का आधा घमंड टूट गया। इस विनम्रता की बात भी सद्गुगुरु जाम्भोजी ने भी कही है। कथा सुनाते हुए आचार्यश्री ने आगे कहा कि अगर पूजा करते हुए भगवान की याद में आपकी अचानक आंखें भर आए तो यह समझ लो कि भगवान तक आपकी प्रार्थना पहुंच गई है। कथा सुनने प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पहुंच रहे हैं। शनिवार को पुर्णाहुति और प्रसादी के साथ कथा का समापन किया जाएगा।