MP News : ग्राम पंचायत में फर्जी हाजिरी लगाकर प्रभारी सचिव ने किया सरकारी रुपयो का गोलमाल, जांच में 44 लाख की आर्थिक अनियमितता मिली
शासन की योजनाओं को उसके कर्मचारी ही पलीता लगाते हैं। ग्राम और सरकार की योजनाओ में रोजगार सहायक और सचिव महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। जो आम लोगो को सरकार की योजनाआं से लाभांवित कराते है। अगर इनके मन में बेईमानी आ जाए तो फिर अपने परिवार और चहेतो की हाजिरी लगाना ,कुटीर आवास आदि में लाभ दिलाना फर्जी नाम से रुपया देना आदि आसान हो जाते है। मप्र की ग्राम पंचायतों में कई स्थानों पर ऐसा देखा गया है।
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 बालाघाट : मलाजखंड की बिरसा जनपद की ग्राम पंचायत जगला में रोजगार सहायक प्रभारी सचिव रोजगार सहायक दिलीप कुसरे की खूब मनमानी हुई हैं इनकी अनियमितता और लापरवाही का आलम देखिए की गैर हाजिर लोगो की हाजिरी लगाकर पैसा बांटा गया। अपने परिजनों को आवास योजनाओं का नियम विरुद्ध लाभ जबरन लाभ दिलाया।
फर्जी हाजिरी भर सरकारी राशि का गोलमाल –
प्रभारी सचिव कुसरे ने पंचायत के मस्टरोल में भी अपने चहेतों की फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी राशि का गोलमाल किया गया है। वर्ष 2023-24 में पंचायत में करवाए गए करीब 44 लाख के कार्यों के बिलों कां संधारण भी नहीं किया गया है। अब मामले की शिकवा शिकायत के बाद जांच में सब बात नजर आ रही है। जनपद सीईओ ने जांच में अनियमितता पाई और वसूली और सेवा समाप्ति की अनुशंसा की गई।
ग्रामीणों ने की प्रभारी सचिव की शिकायत –
ग्राम पंचायत जगला के ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओ मे एक तरफा लाभ और फर्जी हाजिरी और बिना कार्य कराए राशि के आहरण की जानकारी लगते ही सचिव की शिकायत जनपद सीईओ से की गई। सीईओं द्वारा मामले की जांच कराने के उपरांत कई तरह की आर्थिक अनियमितता उजागर हुई।
जिला पंचायत सीईओ को भेजी जांच रिर्पोट –
इस पूरे प्रकरण में जांच प्रतिवेदन तैयार कर कार्रवाई के लिए जिला पंचायत सीईओ को प्रेषित किया है। प्रतिवेदन में दिलीप सिंह कुसरे ने वित्तीय अनियमितता राशि 26520 रुपये के फर्जी मस्टर रोल के माध्यम से बिना कार्य स्वीकृति के भुगतान करना पाया गया है। जनपद सीईओ ने स्वयं पंचायत के निरीक्षण के लिए सूचना देने के बाद दिलीप सिंह कुसरे पंचायत भवन में उपस्थित नहीं हुआ था। रिकार्ड का सूक्ष्म परीक्षण करने पर पाया गया कि पंचायत में वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 4459200 रुपये की राशि 18 जनवरी 2024 तक व्यय किया गया है। बिलों का भुगतान केश बुक में दर्ज किया गया है लेकिन किस कार्य के लिए किस फर्म को कितनी राशि भुगतान किया गया स्पष्ट नहीं होना पाया। जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता किया जाना प्रतीत होता है।

