jhankar
ब्रेकिंग
₹7.30 करोड़ की लागत से बनेगी घोघई नदी पर पुलिया, विधायक अभिजीत शाह ने किया भूमिपूजन खेत बचाओ अभियान के तहत गांवों में कृषक चौपाल आयोजित बानापुरा में फिर खुला स्पा सेंटर, नगर में चर्चा तेज अनुमति को लेकर सवाल, नागरिकों ने की जांच की मांग हरदा में 450 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर लगाए रेडियम टेप और रिफ्लेक्टर धार में भीषण हादसा: डिवाइडर से टकराकर पुलिया से नीचे गिरी कार, आग लगने से 4 युवक जिंदा जले, 1 गंभीर पीथमपुर हादसे में मृत मासूमों को जागो जन रजक समाज ने दी श्रद्धांजलि नर्मदांचल युवक-युवती परिचय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बैठक में चर्चा 50वें जन्मदिन पर नेमा दंपती ने लिया अंगदान का संकल्प, ऑनलाइन फॉर्म भरकर ली शपथ कोटा में पपीते में दिखे गणपति, बगीचे का फल बना आस्था का केंद्र गिर गाय के नाम पर सोयाबीन तेल और केमिकल से बना घी बेचने का भंडाफोड़, जूनागढ़ में खाद्य विभाग की बड़ी...

अब पानी की बूंद बूंद को तरसेगा पाकिस्तान भारत ने भेजा नोटिस

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 । अभी चौंकाने वाली बड़ी खबर मीडिया में आ रही है कि भारत ने 30 अगस्त को पाकिस्तान को एक नोटिस भेजा। जिसमें 1960 में हुई सिंधु जल संधि में आवश्यक परिवर्तन किए जाने की बात कही है।

भारत सरकार ने इस संबंध में पाकिस्तान को एक नोटिस भी भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नोटिस में कहा गया कि मौजूदा हालातों को देखते हुए सिंधु जल संधि को बरकरार रखना संभव नहीं। भारत ने इस सिंधु जल संधि में बदलाव किए जाने की भी बात कही है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को भेजे नोटिस में भारत ने साफ कहा कि 1960 से ही ये संधि चल रही है और अब इसके विभिन्न अनुच्छेदों का वास्तविक मूल्यांकन होना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान को 30 अगस्त को संधि से जुड़ा नोटिस भेजा।

भारत ने नोटिस में क्या कहा …?

- Install Android App -

भारत में नोटिस में लिखा कि सिंधु नदी के पानी का उपयोग और जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा है, भारत स्वच्छ ऊर्जा की तरफ अग्रसर है और जरूरी है कि संधि में बदलाव पर विचार हो. भारत ने आतंकवाद का जिक्र करके भी पाकिस्तान को लताड़ लगाई। भारत ने कहा कि पाकिस्तान लगातार हमारी उदारता का अनुचित लाभ उठाने में जुटा है।

सिंधु जल संधि की खास बातें !

19 सितंबर, 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई. वर्ल्ड बैंक ने इस संधि की मध्यस्थता की. कराची में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए।

संधि के तहत सिंधु नदी के पानी का बंटवारा हुआ. सिंधु नदी तंत्र की तीन पूर्वी नदियों (रावी, सतलुज, और ब्यास) का पानी भारत को और तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, और चिनाब) का पानी पाकिस्तान को मिला।

भारत को पश्चिमी नदियों पर रन-ऑफ-द-रिवर (आरओआर) परियोजनाओं के जरिए बिजली बनाने का भी अधिकार प्राप्त है.- संचार के लिए एक चैनल बनाए रखने और संधि के कार्यान्वयन के लिए एक स्थायी सिंधु आयोग का गठन किया गया। हर साल कम से कम एक बार आयोग की बैठक आयोजित होती है और यह बैठक बारी-बारी भारत और पाकिस्तान में होती है।