सीहोर। जिले में किसानों के साथ नकली खाद का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। भैरूंदा तहसील के निमोटा और महागांव गांव में किसानों को ‘उत्तम शक्ति पावर’ नाम की जैविक खाद बताकर कोयले की राख और मिट्टी का मिश्रण बेचा गया। सरकारी खाद की किल्लत के कारण किसानों ने 40 किलो की बोरियां रुपए 1500 में निजी डीलरों से खरीदी थीं। जांच में यही खाद नकली निकली। इसके बाद शिकायत हुई और राजस्व और कृषि विभाग की टीम ने महागांव कदीम में छापा मारकर 210 बोरियां जब्त कीं, जबकि 500 पहले ही बिक चुकी थीं। कृषि विभाग ने गोपालपुर थाने में एफआईआर की सिफारिश की है। एसडीएम ने दोषियों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है. इस घटनाक्रम से सीहोर में हड़कंप मचा हुआ है।
सरकारी केंद्रों पर खाद की कमी के चलते किसान निजी डीलरों से खाद खरीदने को मजबूर हुए। इन डीलरों ने 40 किलो की बोरी रुपए 1500 में बेची। जब किसानों ने खाद की बोरियां खोलीं, तो उनमें राख और मिट्टी का मिश्रण देखकर हैरान रह गए। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी शिकायत सरपंच वीरेंद्र सिंह राजपूत और अधिकारियों से की। शिकायत पर नायब तहसीलदार अनीस कुरैशी और कृषि अधिकारी बी.एस. राज मौके पर पहुंचे। जांच में खाद पूरी तरह से नकली पाई गई, जिसमें किसी भी पोषक तत्व का अभाव था। इसके बाद राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने महागांव कदीम में छापा मारा। छापे में 210 बोरियां बरामद हुईं, जबकि 700 बोरियों में से 500 पहले ही बेची जा चुकी थीं। इसको लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है।
पूछताछ में सामने आया कि तेजपाल और अजय राजपूत नामक दो व्यक्तियों ने खुद को रजिस्टर्ड सप्लायर बताकर किसानों को ठगा। इनके पास कोई वैध दस्तावेज़, लॉट नंबर या लाइसेंस नहीं था। कृषि विभाग ने नकली खाद के नमूने लैब भेज दिए हैं। साथ ही गोपालपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। किसानों का कहना है कि पूरे प्रदेश में नकली खाद और नकली बीज पकड़ाए जा रहे हैं। खेतों को लेकर किसी का ध्यान नहीं है। प्रशासन ने धरपकड़ शुरू नहीं किया।

