इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी के मामले में बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही बीमारों का 10 अस्पतालों में पूरी तरह मुफ्त इलाज का आदेश दिया है। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी की ओर से उच्च न्यायालय में जनहित याचिका पेश की गई थी।
उमंग सिंघार ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा कॉलोनी में गंदा पानी पीने से 9 लोगों की मृत्यु हो गई तथा दूषित पानी से प्रभावित लोगों का इलाज किया जा रहा है। यह संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है, प्रभावितों को शीघ्र उपचार उपलब्ध हो तथा दूषित पानी किसी भी स्थिति में सप्लाई न हो इसकी रोकथाम यथाशीघ्र किये जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे लिखा कि प्रकरण गंभीर स्वरूप का है तत्काल जांच की जाकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाय एवं प्रभावितों को शीघ्र मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
इंदौर जाएंगे सीएम मोहन यादव
मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। सीएम बुधवार शाम इंदौर जाएंगे। अस्पताल में भर्ती पीड़ितों से मुलाकात करेंगे. इसके साथ ही मृतकों के परिजनों से भी मुलाकात कर सकते हैं।
मामले की जांच के लिए समिति गठित
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए सीएम ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले एवं प्रभारी असिस्टेंट इंजीनियर (पीएचई) योगेश जोशी को निलंबित और प्रभारी डिप्टी इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में IAS नवजीवन पंवार, सुप्रिडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ शैलेश राय हैं।

