_वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी मीडिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए सात सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक विस्तृत टारगेट लिस्ट (Target List) तैयार कर ली है।
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल गहराने लगे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बनाई है। इस रणनीति में वॉशिंगटन के साथ दुनिया के 7 प्रमुख सहयोगी देश भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।
प्रमुख ठिकानों पर ‘लॉक’ हुआ निशाना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टारगेट लिस्ट में ईरान के उन संस्थानों को शामिल किया गया है जो उसकी सैन्य और परमाणु शक्ति की रीढ़ माने जाते हैं।
ईरान के परमाणु केंद्र
– फोर्डो, नतांज और इस्फाहान जैसे संवेदनशील परमाणु ठिकाने, जहाँ यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का काम चल रहा है।
ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचा
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालय, मिसाइल लॉन्च पैड और ड्रोन निर्माण इकाइयां।
नेतृत्व और सुरक्षा
शीर्ष सैन्य अधिकारी और सुरक्षा बल जो देश के भीतर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को दबाने में शामिल हैं।
तख्तापलट और ‘रिजीम चेंज’ की चर्चा
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि इस बार हमलों का उद्देश्य केवल परमाणु कार्यक्रम को रोकना नहीं, बल्कि ईरान में ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) के लिए माहौल तैयार करना भी हो सकता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि सैन्य दबाव और आंतरिक प्रदर्शनों के जरिए मौजूदा व्यवस्था को कमजोर किया जा सकता है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी ‘आर्माडा’ की तैनाती
तनाव को देखते हुए अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है:
विमानवाहक पोत
USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर से होते हुए मिडिल ईस्ट पहुँच चुका है।
फाइटर जेट्स
जॉर्डन और कतर के एयरबेस पर दर्जनों F-15 और रिफ्यूलिंग विमानों को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया है।
मिसाइल डिफेंस
क्षेत्र में सुरक्षा के लिए अतिरिक्त THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं।
ईरान ने दी जवाबी चेतावनी
ईरान ने इन धमकियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह “तेल अवीव के दिल” को निशाना बनाएगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने उनकी मिसाइलों की जद में हैं। सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी धरती या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने देंगे।
विशेषज्ञों की राय
इस पूरे मामले में जानकारों का मानना है कि अमेरिका की यह “अनप्रिडिक्टिबिलिटी” (अनिश्चितता) की रणनीति है, जिसका उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर लाना या उसे परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह रोकना है।

