इंदौर। इंदौर में चर्चित लव जिहाद फंडिंग केस में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले में 26 मामलों के आरोपी और वार्ड-58 से पूर्व कांग्रेस पार्षद रहे अनवर कादरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। जिला अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अनवर कादरी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे बुधवार 4 फरवरी को मंजूर कर लिया गया।
अनवर कादरी पर लगे हैं लव जिहाद में फंडिंग के आरोप
अनवर कादरी पर लव जिहाद के लिए फंडिंग करने, युवतियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराने और संगठित गिरोह को आर्थिक मदद देने जैसे गंभीर आरोप हैं। पुलिस जांच में कादरी का नाम सामने आने के बाद यह मामला न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में सुर्खियों में आ गया था। आरोप है कि कादरी ने कई मामलों में आरोपियों को कानूनी और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई।
अनवर कादरी के खिलाफ कई आपराधिक मामले
बताया जा रहा है कि अनवर कादरी के खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम से जुड़े मामले शामिल हैं। इन्हीं गंभीर आरोपों के चलते जिला अदालत ने पहले उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
इसके बाद कादरी ने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है, जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल में समय लग सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है। इन दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली।
जमानत के बाद बना चर्चा का विषय
हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बावजूद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों और हिंदू संगठनों ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह मामला समाज से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इसमें सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कानून के तहत हर आरोपी को अपनी बात रखने और न्याय पाने का अधिकार है।
रिहाई के बाद अनवर कादरी पर पुलिस की नजर
फिलहाल अनवर कादरी की रिहाई के बाद पुलिस और प्रशासन की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वह जमानत की शर्तों का पालन करता है या नहीं। वहीं, इस केस में दर्ज अन्य आरोपियों की भूमिका और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर भी जांच जारी है।

