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MP OBC Reservation Update: सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर हाई कोर्ट को स मामला, 13% अतिरिक्त आरक्षण पर रोक बरकरार

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली/जबलपुर : 

मध्य प्रदेश में लंबे समय से लंबित ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने इस पूरे प्रकरण को वापस जबलपुर हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया है। अब इस मामले की कानूनी वैधता और संवैधानिकता की जांच हाई कोर्ट द्वारा नए सिरे से की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: 13% अतिरिक्त कोटे पर अंतरिम रोक जारी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक हाई कोर्ट इस मामले में किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुँचता, तब तक बढ़े हुए 13 प्रतिशत आरक्षण पर अंतरिम रोक लागू रहेगी। अदालत का मानना है कि चूंकि यह मामला राज्य के कानून और विशिष्ट संवैधानिक सीमाओं से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ही इस पर फैसला लेने के लिए उचित मंच है।

क्या है पूरा विवाद ?

मध्य प्रदेश में मूल रूप से ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत था, जिसे वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। इस फैसले के बाद प्रदेश में कुल आरक्षण की सीमा निर्धारित मापदंडों से ऊपर चली गई, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। सरकार बाद में इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई थी, लेकिन अब गेंद फिर से हाई कोर्ट के पाले में है।

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मध्य प्रदेश में आरक्षण का मौजूदा गणित

प्रदेश में विभिन्न वर्गों को मिलने वाले आरक्षण वर्तमान में इस प्रकार है। अनुसूचित जनजाति (ST) को 20% ,अनुसूचित जाति (SC) को 14% ,ओबीसी (OBC) – 14%,आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) को 10% इस प्रकार कुल (वर्तमान मान्य) आरक्षण 58% हुआ है।

50% की सीमा और संवैधानिक चुनौती

सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी कोटा 27 प्रतिशत करने से कुल आरक्षण का आंकड़ा 71 प्रतिशत तक पहुँच जाता है। यही कारण है कि यह मामला कानूनी विवादों में घिरा हुआ है। अब जबलपुर हाई कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राज्य सरकार के पास इस सीमा को लांघने का पर्याप्त और संवैधानिक आधार मौजूद है।

भविष्य की राह और नियुक्तियों पर असर

इस फैसले का सीधा असर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और अन्य सरकारी भर्तियों पर पड़ेगा। पिछले कई वर्षों से कई परीक्षाओं के परिणाम और नियुक्तियां इसी ’13 प्रतिशत बनाम 27 प्रतिशत’ के फेर में अटकी हुई हैं। ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद जताई थी, लेकिन अब उन्हें हाई कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करनी होंगी।