शनिवार देर रात 1:30 बजे जारी हुई लिस्ट, कमिश्नरी सिस्टम पर भी पड़ा असर
आधी रात को जारी हुई तबादला सूची
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे 62 आईपीएस अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी कर दिया। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव में प्रदेश के 55 जिलों में से 24 जिलों के पुलिस अधीक्षक यानी एसपी बदले गए हैं। यानी लगभग 50% जिलों की पुलिस कमान अब नए अधिकारियों के हाथ में होगी।
तबादलों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे कमिश्नरी सिस्टम वाले शहरों के साथ-साथ कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। सरकार के इस कदम को पुलिसिंग को चुस्त-दुरुस्त करने और कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
जिलों और कमिश्नरी सिस्टम पर दिखा असर
इस फेरबदल में सबसे ज्यादा बदलाव जिलों और कमिश्नरी व्यवस्था में देखने को मिला है। कई जिलों में लंबे समय से जमे अधिकारियों को हटाकर नए चेहरे लाए गए हैं। वहीं कमिश्नरी सिस्टम वाले शहरों में भी डीसीपी और एडीसीपी स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने हाल के दिनों में अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर जो समीक्षा की थी, उसी के आधार पर यह तबादले किए गए हैं। खासकर उन जिलों पर फोकस किया गया है जहां अपराध दर या शिकायतें ज्यादा सामने आ रही थीं।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर
गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तबादलों का उद्देश्य पुलिस प्रशासन में नई ऊर्जा लाना और फील्ड लेवल पर बेहतर कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को राज्य पुलिस मुख्यालय, विशेष शाखा और अन्य महत्वपूर्ण इकाइयों में पदस्थ किया गया है।
इससे पहले भी राज्य सरकार ने पुलिस विभाग में समय-समय पर फेरबदल कर प्रदर्शन आधारित पदस्थापना पर जोर दिया है। इस बार भी तबादलों में वरिष्ठता के साथ-साथ कार्य अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड को ध्यान में रखा गया है।
आने वाले दिनों में और बदलाव के संकेत
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यह तबादले अभी सिर्फ शुरुआत हैं। आने वाले हफ्तों में और भी जिलों के कलेक्टर और एसपी बदले जा सकते हैं। चुनावी साल को देखते हुए सरकार कानून-व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत करना चाहती है, ताकि जनता में प्रशासन के प्रति भरोसा बना रहे।
कानून व्यवस्था मजबूत बने
तबादलों के बाद अब नए पदस्थ अधिकारियों से उम्मीद है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आम जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे।

