सुसाइड नोट और मृत्यु-पूर्व कथन के बावजूद आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का आरोप सिद्ध नहीं, पांचों आरोपी बरी
प्रधान एवं जिला सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के सूक्ष्म अवलोकन के बाद सुनाया फैसला
हरदा। रोहित कनेरे को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के मामले में प्रधान एवं जिला सत्र न्यायाधीश ने पांचों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का सूक्ष्म अवलोकन करने तथा बचाव पक्ष के तर्कों को ध्यान में रखते हुए 2 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
मामले में अभियोजन की ओर से कुल 15 साक्षियों के बयान न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए गए थे। प्रकरण में मृतक का सुसाइड नोट जब्त किया गया था, वहीं पुलिस द्वारा मृतक का मृत्यु-पूर्व कथन भी प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का आरोप सिद्ध नहीं माना।
सल्फास सेवन के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती
अभियोजन के अनुसार घटना 3 अगस्त 2025 की है। रोहित कनेरे ने सल्फास का सेवन कर लिया था। इसके बाद उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल हरदा ले जाया गया। मामले में थाना टिमरनी में मर्ग क्रमांक 57/25, धारा 194 बीएनएसएस के तहत जांच शुरू की गई।
मर्ग जांच के दौरान मृतक के पिता रामविलास, माता आशाबाई, भाई राहुल, भाभी रीना, बहन मनीषा, चाचा गोविंद एवं चचेरे भाई आशीष सहित अन्य के कथन दर्ज किए गए।
पत्नी के मायके रहने को लेकर विवाद का आरोप
अभियोजन के अनुसार रोहित की शादी करीब सात वर्ष पहले हरदा निवासी राजकुमारी उर्फ संगीता से हुई थी। दोनों की चार वर्षीय बेटी है। शादी के बाद से पत्नी के बार-बार मायके जाने को लेकर दोनों के बीच विवाद रहता था। बताया गया कि करीब दो वर्षों से राजकुमारी अपनी बेटी के साथ मायके में रह रही थी।
अभियोजन के मुताबिक रोहित जब अपनी बेटी से मिलने जाता था, तो उसे बच्ची से मिलने नहीं दिया जाता था, जिससे वह परेशान रहता था। आरोप था कि पत्नी और ससुराल पक्ष के गौरीशंकर, मंजूबाई, रामकृष्ण एवं माखन सिंह द्वारा उसे दहेज प्रताड़ना के मामले में फंसाने की धमकी दी जाती थी तथा गांव का गंवार कहकर अपमानित किया जाता था।
सुसाइड नोट की हुई जांच
मर्ग जांच के दौरान मृतक के घर से सुसाइड नोट जब्त किया गया। उसका ड्राफ्ट तैयार कर हस्तलिपि मिलान के लिए हस्तलिपि विशेषज्ञ, भोपाल भेजा गया। मृतक का प्रिजर्व विसरा भी रासायनिक परीक्षण के लिए एफएसएल भोपाल भेजा गया।
सुसाइड नोट एवं साक्षियों के कथनों के आधार पर प्रथम दृष्टया आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का अपराध पाए जाने पर थाना टिमरनी में अपराध क्रमांक 428/25, धारा 108 सहपठित धारा 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
15 साक्षियों के बयान के बाद भी आरोप नहीं हुआ सिद्ध
विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा मौका तैयार किया, साक्षियों के कथन दर्ज किए और आरोपियों को गिरफ्तार किया। अनुसंधान पूर्ण होने के बाद अभियोग पत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, टिमरनी के न्यायालय में पेश किया गया।
मामला सत्र न्यायालय से विचारणीय होने के कारण 19 सितंबर 2025 को उपार्पण आदेश पारित कर प्रकरण सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया गया। विचारण के दौरान अभियोजन ने 15 साक्षियों के बयान कराए।
न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत समस्त साक्ष्यों एवं दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को सिद्ध नहीं पाया। इसके बाद न्यायालय ने रामकृष्ण, गौरीशंकर, मंजूबाई, संगीता बाई और माखन सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
प्रकरण में आरोपी रामकृष्ण, गौरीशंकर, मंजूबाई एवं संगीता बाई की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार सोनी तथा आरोपी माखन सिंह की ओर से अधिवक्ता अनीश खान ने पैरवी की।

