आज भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: देशभर में धूमधाम से मन रही है जन्माष्टमी, मंदिरों में गूंज रहे हैं नंद घर आनंद भयो के जयकारे
मथुरा-वृंदावन से लेकर उज्जैन-इंदौर तक भक्ति में डूबे श्रद्धालु
आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। देशभर के कृष्ण मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, द्वारका और उज्जैन के इस्कॉन मंदिरों में रात 12 बजे महा-अभिषेक और महाआरती होगी। घर-घर में लड्डू गोपाल का श्रृंगार कर झूला सजाया गया है।
क्यों हुआ कृष्णावतार ?
पौराणिक कथा के अनुसार मथुरा में कंस नाम का अत्याचारी राजा था। वह अपनी बहन देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर देता है। आकाशवाणी होती है कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस का वध करेगा। कंस एक-एक कर देवकी के 7 पुत्रों को मार देता है।
भादो मास की आधी रात को, घनघोर बारिश और अंधेरे में भगवान विष्णु स्वयं देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के रूप में प्रकट होते हैं। वासुदेव जी बालकृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार गोकुल में नंद बाबा के यहां छोड़ आते हैं। वहां यशोदा मैया ने उन्हें पाला और वहीं से कृष्ण ने लीलाएं शुरू कर कंस का वध कर धर्म की स्थापना की। इसलिए इस रात को धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक माना जाता है।
आज जन्माष्टमी पर ऐसे करें भगवान का पूजन
1. व्रत और संकल्प: सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर फलाहार करें।
2. श्रृंगार और झूला: शाम को लड्डू गोपाल को गंगाजल से स्नान कराएं। नया वस्त्र, मोर मुकुट पहनाएं। झूले को फूलों से सजाएं।
3. भोग: रात 12 बजे से पहले पंजीरी, माखन-मिश्री, पेड़ा और तुलसी दल का भोग तैयार रखें।
4. मंत्र: रात 12 बजे कृष्ण जन्म के समय इस मंत्र का जाप करें –
“ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।”
5. आरती: इसके बाद कृष्ण जन्म की आरती, शंख और घंटी बजाकर उत्सव मनाएं और प्रसाद बांटें।
मान्यता है कि आज रात 12 बजे व्रत रखकर जो भक्त सच्चे मन से कृष्ण का पूजन करता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।

