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खातेगांव तहसील में सोयाबीन पर पीला मोजेक का खतरा, किसान चिंतित – कृषि विभाग ने दी रोकथाम की सलाह

देवास / खातेगांव। खातेगांव तहसील में इस बार सोयाबीन की फसल अच्छी स्थिति में है, लेकिन अब पीला मोजेक रोग का खतरा मंडराने लगा है। इसे लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र देवास और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने 6 सितंबर को खातेगांव ब्लॉक के ग्राम सुकरास, भंवरास, सुकरदी, मनोरा, आमला और विक्रमपुर में किसान के खेतों का दौरा किया। भ्रमण के दौरान कई खेतों में सोयाबीन की पत्तियों पर पीला मोजेक के लक्षण मिले।

क्या है पीला मोजेक रोग?

यह एक वायरस जनित रोग है जो सफेद मक्खी (White Fly) के जरिए एक पौधे से दूसरे पौधे में तेजी से फैलता है। पत्तियों पर पीले धब्बे, नसों का उभरना और पत्तियों में सिकुड़न इसके मुख्य लक्षण हैं। समय पर नियंत्रण न होने पर यह पूरी फसल को 30 से 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता है।

कृषि विभाग की सलाह –

उप संचालक कृषि ज्ञानसिंह मोहनिया और वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र सिंह ने किसानों को निम्न उपाय बताए

– खेत की रोजाना निगरानी करें। रोग ग्रस्त पौधे दिखते ही उखाड़कर खेत से दूर गड्ढे में दबा दें या जला दें।

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– सफेद मक्खी को पकड़ने के लिए खेत में पीले चिपचिपे ट्रैप (येलो स्टिकी ट्रैप) 20-25 प्रति हेक्टेयर लगाएं।

– सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए थायोमेथोक्सम 25% WG की 125 ग्राम मात्रा या इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL की 125 मिली मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

दीर्घकालीन बचाव

– पुरानी किस्म JS-9560 की जगह रोग-प्रतिरोधक उन्नत किस्मों की बुवाई करें।

– बीज उपचार करके ही बुवाई करें।

– खेत के आसपास खरपतवार न रहने दें, क्योंकि वायरस ऑफ-सीजन में उनमें जीवित रहता है।

भ्रमण के दौरान सहायक संचालक लोकेश गंगराडे, एन.एस. गुर्जर, कृषि विस्तार अधिकारी दिलीप मीणा, दिनेश पंवार और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत मैदानी अमले से संपर्क करें, ताकि फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।