बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर पहले निजी अस्पताल, फिर सरकारी अस्पताल और इंदौर किया गया रेफर; इलाज के दौरान मौत
हरदा। शहर में एक नवजात बच्चे की इलाज के दौरान मौत का मामला सामने आया है। मामले में बच्चे के पिता विनोद कुमार जैन ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता अंकित जैन, उम्र 32 वर्ष, निवासी नेहरू स्टेडियम के पास, हरदा ने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 को उनकी पत्नी आकृति जैन ने एक बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे का जन्म हरदा के बघेल अस्पताल में हुआ था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 5 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे बघेल अस्पताल से बच्चे को यह कहते हुए छुट्टी दे दी गई कि बच्चे का मल त्याग नहीं हो रहा है और उसे उचित इलाज के लिए कहीं और ले जाया जाए। शिकायतकर्ता के अनुसार, अस्पताल के डॉक्टर एवं स्टाफ द्वारा कई दिनों तक बच्चे की स्थिति को लेकर उचित जानकारी नहीं दी गई।
इसके बाद परिजन बच्चे को शासकीय अस्पताल हरदा लेकर पहुंचे, जहां बच्चे को भर्ती किया गया। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद उसे तत्काल इंदौर रेफर किया गया। रात करीब ढाई बजे बच्चे को महात्मा गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, इंदौर ले जाकर भर्ती कराया गया।
शिकायत के अनुसार, 6 अक्टूबर को बच्चे के पेट का ऑपरेशन किया गया और करीब दो दिन बाद मल त्याग से संबंधित दूसरे ऑपरेशन की तैयारी थी। इसी दौरान 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:15 बजे नवजात की मौत हो गई।
परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए अस्पतालों में कथित लापरवाही और इलाज में देरी को जिम्मेदार बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नवजात का शव हरदा लाकर मर्चुरी में रखा गया है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इनका कहना है।
परिजनो ने जानकारी छिपाई है। आरोप झूठे है। परिजनो ने दो डॉक्टरों को दिखाया था। अब हॉस्पिटल संचालक को बदनाम कर रहे है।
डॉक्टर विशाल सिंह बघेल
संचालक हरदा

