माँ सिद्धिदात्री का होगा आज पूजन
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 हरदा।
आज नवरात्रि का आखिरी दिन है, इसलिए इसे सिद्धि का दिन माना जाता है। नवरात्रि की सारी साधना आज पूरी होती है। आज का रंग मोरपंखी हरा है।
कौन हैं माँ सिद्धिदात्री….?
माँ के नाम का अर्थ ही है –
सिद्धि = अलौकिक शक्ति / सफलता
दात्री = देने वाली
यानी जो सभी सिद्धियों को देने वाली हैं। ये माँ दुर्गा का 9 वाँ दिव्य स्वरूप हैं। इनकी 4 भुजाएं हैं, जिसमें शंख, चक्र, गदा और कमल होता है। ये कमल के फूल पर बैठी हैं, कहीं-कहीं शेर पर सवार भी दिखती हैं।
पौराणिक कहानी और मान्यता
कथा के अनुसार जब सृष्टि में अंधकार था, कुछ नहीं था, तब देवी के इसी शक्ति रूप ने सृष्टि का निर्माण किया।
भगवान शिव ने इन्हीं आदि-शक्ति की कठोर तपस्या करके सभी 8 सिद्धियां प्राप्त की थीं – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। और 18 प्रकार की गौण सिद्धियाँ भी। इन्हीं की कृपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वो अर्धनारीश्वर कहलाए।
मान्यता है कि माँ सिद्धिदात्री की पूजा देवता, गंधर्व, यक्ष, असुर, सिद्ध सभी करते हैं। जो भी इन्हें सच्चे मन से पूजता है, उसे जीवन में कोई भी कार्य असंभव नहीं लगता और मन के नकारात्मक विचार खत्म हो जाते हैं।
आज की पूजन विधि – कैसे करें पूजा…?
आज महानवमी और सिद्धिदात्री पूजन एक साथ है। शुभ मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 की सुबह 10:51 बजे तक अष्टमी और उसके बाद से नवमी शुरू होगी, जो रात 12:35 तक रहेगी। इसलिए पूरे दिन पूजा कर सकते हैं।
पूजा की विधि
सुबह स्नान करके साफ, मोरपंखी हरे रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर माँ सिद्धिदात्री की फोटो / मूर्ति रखें, घी का दीपक जलाएं।
माँ को रोली, अक्षत, हल्दी, मेहंदी, अबीर, गुलाल और गुलाब के फूलों की माला अर्पित करें।आज कन्या पूजन / कंजक का सबसे बड़ा महत्व है – 9 कन्याओं को भोजन कराएं।भोग में माँ को हलवा-पूरी-चने, खीर और नारियल से बनी मिठाई बहुत प्रिय है।
हवन करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
मंत्र और आरती
बीज मंत्र:
`ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः`
मुख्य मंत्र:
`सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।`
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
इसके बाद माँ सिद्धिदात्री की आरती करके क्षमा प्रार्थना करें और नवरात्रि व्रत का समापन करें। कल 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।

