_सिंहस्थ 2028 से पहले ओंकारेश्वर में बड़ा गतिरोध। पुनर्वास, मुआवजे और रोजगार की मांगों पर सहमति न बनने से आज 19 अक्टूबर से स्थानीय लोगों ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया है। होटल से लेकर नाव तक सब बंद, श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ने के आसार हैं_
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 खंडवा। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच ओंकारेश्वर में आज 19 अक्टूबर सोमवार से बंद शुरू हो गया है। स्थानीय रहवासियों ने विकास कार्यों से पहले पुनर्वास और रोजगार की स्पष्ट नीति की मांग की है। सहमति न बनने के बाद होटल, दुकानें, नाव और ऑटो बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
बंद क्यों किया जा रहा है…?
नगरवासियों का कहना है कि वे सिंहस्थ या विकास के विरोधी नहीं हैं। आपत्ति इस बात पर है कि प्रस्तावित कार्यों से सैकड़ों परिवारों के घर और पीढ़ियों से चल रहा रोजगार खतरे में है।
उनकी मुख्य मांग है – विस्थापन से पहले पुनर्वास, उचित मुआवजा और रोजगार का विकल्प तय किया जाए, केवल मकान देना पर्याप्त नहीं है।
सबसे बड़ा मुद्दा – रोजगार
ओंकारेश्वर की पूरी अर्थव्यवस्था तीर्थयात्रियों पर टिकी है। होटल, रेस्टोरेंट, फूल-प्रसादी, पूजा सामग्री, पंडा-पुरोहित का काम, नाव संचालन और ऑटो रिक्शा – ये सभी स्थानीय परिवारों की आजीविका हैं।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि अगर उन्हें तीर्थ क्षेत्र से दूर बसाया गया तो दुकान-व्यवसाय खत्म हो जाएगा। इसलिए पुनर्वास नीति में जमीन और मकान के साथ-साथ व्यापार की जगह भी शामिल होनी चाहिए।
डुकिया पुनर्वास स्थल पर सवाल
प्रशासन द्वारा प्रस्तावित डुकिया स्थल को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वह स्थान मुख्य मंदिर और घाटों से दूर है, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं पहुंचती, ऐसे में वहां रोजगार चलना मुश्किल होगा।
श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ेगा..?
बंद में व्यापारी संघ, नाविक संघ, पंडा संघ और ऑटो यूनियन के शामिल होने से तीर्थयात्रियों को परेशानी हो सकती है। भोजन, प्रसादी, नाव, लोकल ऑटो और होटल जैसी बुनियादी सेवाएं बाधित होने की आशंका है। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए दिक्कत बढ़ सकती है।
प्रशासन का पक्ष
पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि बंद के मद्देनजर श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की गई है। पेयजल, बसों को पुराने बस स्टैंड तक जाने की अनुमति और जरूरी सुविधाएं प्रशासन संभालेगा ताकि यात्रियों को ज्यादा परेशानी न हो।

