जानिए कौन हैं माँ महागौरी…?
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 हरदा। नवरात्रि की अष्टम शक्ति महागौरी हैं। इनका रंग शंख, चंद्र और कुंद के फूल जैसा अत्यंत गौरवर्ण है, इसलिए इन्हें महागौरी कहा गया। इनके 4 भुजाएं हैं, वृषभ (बैल) पर सवारी करती हैं, एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू, तीसरा अभय और चौथा वरद मुद्रा में है।
प्राचीन मान्यता और कहानी
कथा के अनुसार माँ पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। वर्षों तक धूप, सर्दी, वर्षा सहने से उनका शरीर काला पड़ गया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगा जल से स्नान कराया, जिससे उनका शरीर विद्युत की तरह कांतिमान गौर हो गया, तब से उनका नाम महागौरी पड़ा।
दूसरी मान्यता है कि जब माँ ने रक्तबीज और शुंभ-निशुंभ का वध करने के लिए उग्र रूप धारण किया था, तब सारे देवताओं ने इन्हीं महागौरी रूप की स्तुति करके शक्ति प्राप्त की थी।
पूजन विधि आज के दिन
सुबह स्नान कर सफेद या हल्के गुलाबी वस्त्र पहनें। चौकी पर माँ महागौरी की मूर्ति / फोटो स्थापित कर गंगाजल से शुद्ध करें। सफेद फूल, बेलपत्र, सफेद चंदन और 5 लौंग का जोड़ा अर्पित करें। भोग में नारियल, हलवा, पूड़ी और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। कन्या पूजन की तैयारी वाले लोग आज खीर-पूड़ी बनाते हैं।
मां का ध्यान मंत्र
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
मंत्र – *ॐ देवी महागौर्यै नमः* का 108 बार जाप करें।घी के दिए और कपूर से आरती करें।
पूजन का महत्व क्या है…..?
– माँ महागौरी को सौंदर्य, पवित्रता और स्त्री शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
– मान्यता है कि आज के दिन सच्चे मन से पूजन करने से सभी पाप धुल जाते हैं, वैवाहिक जीवन में सुख आता है और अविवाहित लड़कियों के विवाह की बाधा दूर होती है।
– अष्टमी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

