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सनातन धर्म में शस्त्र पूजन दशहरे का सबसे मुख्य अनुष्ठान है

जानिए यह कब से प्रारंभ हुआ…?

भारतीय सनातन संस्कृति में शस्त्र और शास्त्र का बड़ा महत्व होता है हमारे वैदिक को परंपराओं में जहां शास्त्रों का प्रतिपादन किया गया तो उसी के साथ अधर्म के विरुद्ध लड़ने के लिए शास्त्रों का भी विशेष महत्व दिया गया है।

प्राचीन परंपराओं में शस्त्र और शास्त्र दोनों को मनुष्य के लिए जरुरी बताया गया है। इसका लिखित उल्लेख वैदिक काल से मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में आयुध पूजन का जिक्र है। लेकिन एक पर्व के रूप में इसे क्षत्रियों और बाद में मराठा साम्राज्य में छत्रपति शिवाजी महाराज ने बहुत विस्तार दिया। शिवाजी महाराज दशहरे पर सीमोल्लंघन और शस्त्र पूजन बड़े उत्सव के रूप में मनाते थे

क्या मान्यता है…?

पौराणिक मान्यता 3 हैं।

रामायण काल – भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध पर जाने से पहले शमी के पेड़ पर अपने शस्त्र रखकर उनकी पूजा की थी और माँ दुर्गा से विजय का आशीर्वाद लिया था। तब से शस्त्र पूजन से विजय मिलती है ऐसी मान्यता है।

महाभारत काल – पांडवों ने 12 साल के वनवास और 1 साल के अज्ञातवास के दौरान अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपा दिए थे। विजयादशमी के दिन ही उन्होंने उन्हें वापस निकाल कर पूजा की और कौरवों पर विजय प्राप्त की।

क्षत्रिय परंपरा – प्राचीन काल में राजा-महाराजा साल भर युद्ध करते थे। वर्षा ऋतु में युद्ध बंद रहता था। शरद ऋतु आते ही दशहरे के दिन शस्त्रों को साफ करके, घोड़ों-हाथियों को सजाकर फिर से युद्ध अभियान शुरू करते थे।

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अब इसका वर्तमान स्वरूप, और कैसे मनाया जाता है…?

पहले का स्वरूप – तलवार, भाला, ढाल, तीर-धनुष की पूजा।

आज का स्वरूप 4 तरह का हो गया है –

पुलिस और सेना में – आज भी सबसे विधिवत पूजन होता है। सभी राइफल, पिस्टल, तोप, टैंक, हवाई जहाज तक की पूजा होती है। जवान मानते हैं कि शस्त्र ही उनकी रक्षा करता है।

किसानों और कारीगरों में – किसान अपने हल, ट्रैक्टर, फावड़ा और कारीगर अपने औजार, मशीन, लैपटॉप, कलम की भी पूजा करते हैं। इसे ही विश्वकर्मा पूजन और आयुध पूजन भी कहते हैं।

आम घरों में – लोग अपने घर में रखे लाइसेंसी हथियार, चाकू, या प्रतीकात्मक रूप से रसोई के बर्तन, गाड़ी की पूजा करते हैं।

शमी पूजन – शस्त्र पूजन के साथ शमी के पत्तों को सोना समझकर आपस में बांटा जाता है, जिसे लंका से लौटने पर सोना लूटने का प्रतीक माना जाता है।

कब मनाया जाता है…?

हर साल आश्विन शुक्ल दशमी को यानी शारदीय नवरात्रि के 9 दिन बाद 10वें दिन। इस साल 20 अक्टूबर 2026 मंगलवार को विजयादशमी और शस्त्र पूजन है। शुभ मुहूर्त दोपहर 12:52 बजे के बाद रहेगा।