हरदा / जिला पंचायत हरदा द्वारा मनरेगा योजनांतर्गत महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए ‘एक बगिया मां के नाम’ उपयोजना शुरू की गई है। इस योजना में महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम किया जाएगा और उनके जरिए ही योजना को संचालित किया जाएगा। जिला प्रबन्धक ग्रामीण आजीविका मिशन श्री रामनिवास कालेश्वर ने बताया कि ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत हितग्राही महिला को उनकी निजी भूमि पर गड्ढे खोदने, फलदार पौधारोपण करने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग और सिंचाई के लिए जलकुंड बनाने के लिए भी धन राशि प्रदान की जाएगी। उद्यान विकास के लिए महिला हितग्राहियों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा। पात्र स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर स्वीकृत कार्यों में 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच पौधारोपण का कार्य कराया जायेगा। योजना में चयनित पात्र हितग्राही महिला या उसके परिजनों के नाम पर जमीन होना जरूरी है।
जिला प्रबन्धक श्री कालेश्वर ने बताया कि हरदा जिले में ‘एक बगिया मां के नाम’ के तहत प्रत्येक जनपद पंचायत को 100-100 पात्र हितग्राहियों के चयन का लक्ष्य दिया गया है। इस प्रकार जिले की तीनों जनपद पंचायत हरदा, खिरकिया एवं टिमरनी में 300 स्वसहायता समूह की महिला सदस्यों के द्वारा एक बगिया मां के नाम योजना के तहत फलोद्यान तैयार किया जाएगा। इस उपयोजना के तहत सक्रिय स्वसहायता समूह की इच्छुक महिलाएं, जो मनरेगा अंतर्गत हितग्राही चयन हेतु पात्रता में आती हैं, अपनी निजी भूमि में आधा एकड़ से एक एकड़ जमीन में फलदार पौधे का बगीचा लगाकर योजना का लाभ ले सकेंगी।
श्री कालेश्वर ने बताया कि मनरेगा परिषद द्वारा तैयार ‘सिपरी’ एप के माध्यम से चिन्हित भूमि का परीक्षण कर उपयुक्तता की जांच की जाएगी साथ ही पौधारोपण के लिये पौधों की प्रजाति का भी चिन्हांकन किया जाएगा। योजना के तहत पौधा, खाद, कीटनाशक खरीदने के साथ मजदूरी की राशि सीधे हितग्राही के खाते में आएगी। पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की 2 मीटर के पोल लगाकर फेंसिंग की जाएगी और वर्ष भर सिंचाई के लिये पृथक से 50 हजार लीटर जलकुंड के निर्माण की व्यवस्था भी की गई है। बेहतर क्रियान्वयन एवं हितग्राहियों की सहायता के लिए 25 एकड़ के क्लस्टर पर आजीविका मिशन से कृषि सखी को जिम्मेदारी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। श्री कालेश्वर ने बताया कि यह योजना तीन वर्ष की होगी, जिसकी लागत निर्धारित प्राकलन अनुसार आधा से एक एकड़ पर 100 पौधों के लिए दो लाख चौरासी हजार होगी।
ऐसे किया जाएगा हितग्राहियों का चयन
‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह की महिला सदस्य जो फलदार पौधारोपण करना चाहती हों, अपनी निजी भूमि में आधा एकड़ से एक एकड़ जमीन में फलदार पौधे का बगीचा लगाकर योजना का लाभ ले सकेंगी। महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं होने की दशा में उस महिला के पति, पिता, ससुर, पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर पौधरोपण किया जाएगा।
अत्याधुनिक तकनीक से होगा स्थल चयन
‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत पौधरोपण के लिए स्थल चयन सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा। स्थल चयन के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से चयनित हितग्राही की भूमि का परीक्षण किया जाएगा। यह साफ्टवेयर बताएगा कि जलवायु के हिसाब से कौन सा फलदार पौधा जमीन के लिए उपयुक्त है। पौधारोपण किस समय और कब होगा इसका भी सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से पता लगाया जाएगा। उपयोगी जमीन नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं किया जाएगा।

