बड़वानी। सेंधवा में बुधवार उस समय हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नाबार्ड भोपाल से जुड़े करीब 13 करोड़ रुपए के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान शहर के कई इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीबीआई की टीम ने सेंधवा की जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित उद्योगपति के निवास सहित अन्य ठिकानों पर छापेमारी की।
कोलकाता सीबीआई में पहले से एफआईआर
छापे के दौरान उद्योगपति के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसी को अंदर जाने और अंदर से बाहर आने की अनुमति नहीं मिली। सीबीआई छापे से पूरे शहर में हलचल तेज रही। रामकटोरा क्षेत्र में भी सीबीआई की एक अन्य टीम ने दबिश दी। छापे में क्या-क्या मिला, इस बारे में सीबीआई या स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कोई जानकारी नहीं दी। इस मामले में कोलकाता स्थित सीबीआई पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी है।
कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना के लिए लिया लोन
कोलकाता सीबीबीआई की एफआईआर में सेंधवा के उद्योगपतियों पर गंभीर आरोप हैं। एफआईआर के मुताबिक उद्योगपतियों ने सरकारी कर्मचारियों से मिलकर धोखाधड़ी की। आपराधिक साजिश और दस्तावेजों की जालसाजी के आरोप हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 में आरोपियों ने नाबार्ड की फूड प्रोसेसिंग फंड योजना के तहत सेंधवा के समीप जामली गांव में कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना स्थापित करने के लिए करीब 13 करोड़ रुपए का ऋण लिया था।
बैंक की लोन राशि कंपनियों के खातों में जमा की
इस परियोजना की कुल लागत 31 करोड़ रुपए से अधिक थी। परियोजना के लिए केंद्र सरकार के फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय द्वारा लगभग 10 करोड़ रुपए का अनुदान भी स्वीकृत किया गया था। आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी समझौतों और कागजी लेनदेन के जरिए ऋण राशि को अन्य कंपनियों और बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया। साथ ही, समय-समय पर परियोजना की समय-सीमा बढ़वाकर बैंक अधिकारियों को गुमराह किया गया।

