jhankar
ब्रेकिंग
ग्वालियर में अनोखी होली की धूम: 9 हजार की इलेक्ट्रिक पिचकारी बनी आकर्षण इंदौर में जहरीली गैस से हादसा: सीवर की सफाई के दौरान दम घुटने से 2 कर्मचारियों की मौत नर्मदापुरम में युवक-युवती का शव मिलने से सनसनी 3 मार्च को आसमान में ग्रहण का साया! इन 5 राशियों पर मंडरा रहा खतरा? खाटूश्याम जी के दरबार में दिखा अनोखा नजारा, पहली बार पंचमेवों से हुआ श्रृंगार होली से पहले घर के दरवाजे पर लगा दे ये 5 पौधे, रातों-रात बदल सकती है आपकी किस्मत Aaj Ka Rashifal: आज दिनांक 03 मार्च 2026 का राशिफल, जानिए आज क्या कहते है आपके भाग्य के सितारे CM मोहन यादव ने किया होलिका दहन, प्रदेश में सबसे पहले महाकाल को गुलाल लगाकर किया गया शुरू हरदा में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल, वनों की लकड़ी को कहें 'ना', गौकाष्ठ को कहें 'हाँ' हरदा : नरवाई प्रबंधन एवं विभागीय योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा बैठक आयोजित

Betul News:प्रसव पूर्व दर्द सेे कराहती महिला को चादर की झोली में 4 किमी पैदल चलकर अस्पताल पहुुंचाया, सड़क नही है आदिवासी हो रहेे परेशान

मकड़ाई एक्सप्रेेस 24 बैतूला। जिले के भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चिल्लौर के भंवईपुरा गांव तक पहुंचने के लिए चार किमी लंबी सड़क का निर्माण न होने से ग्रामीणों को बारिश में खासी मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं। शनिवार को गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर स्वजन और ग्रामीणों ने कपड़े की झोली बनाई और उसे कंधों पर टांगकर चार किमी की दूरी पैदल तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। यहां से निजी वाहन से महिला को भीमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। अस्पताल में महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया।

चार किमी लंबे रास्ते में चमुल नदी बड़ी बाधा

- Install Android App -

ग्राम भंवईपुरा में 19 वर्षीय ललिता पति महेश को शनिवार को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर स्वजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए परेशान हो रहे थे। ग्रामीणों ने दो लकड़ी में चादर बांधकर झोली बनाई और गर्भवती को उसमें डालकर ले जाने की तैयारी की। चार किमी लंबे रास्ते में चामुल नदी बड़ी बाधा भी है। नदी में पानी होने के बाद भी ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर ललिता को मेघनाथ ढाना तक पहुंचाया। यहां से उसे निजी वाहन में सवार कर भीमपुर अस्पताल ले जाया गया।

जच्चा-बच्चा दोनों की हालत ठीक

भीमपुर के बीएमओ ब्रजेश यादव ने बताया कि ललिता का सुरक्षित प्रसव कराया गया और उसने बालक को जन्म दिया है। जच्चा-बच्चा दोनों की हालत ठीक है। भवईपुर गांव तक सडक़ नहीं होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। नेटवर्क नहीं होने के कारण एंबुलेंस को बुलाने के लिए संपर्क करने में भी बेहद दिक्कत होती है।