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इंदौर में बड़ी कार्रवाई: होटल-हॉस्टल और रेस्टोरेंट पर छापेमारी शुरू

इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में मिलावटखोरी और अशुद्ध खाद्य पदार्थों के व्यापार को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने अब अपनी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप प्रदेशव्यापी शुद्धता अभियान को इंदौर जिले में और अधिक प्रभावी और गतिमान बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि शहरवासियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।

कठोरता से लागू होगा खाद्य सुरक्षा अधिनियम
कलेक्टर शिवम वर्मा ने अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में कहा कि जिले में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के प्रावधानों को पूरी कठोरता के साथ धरातल पर उतारा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभियान केवल औपचारिकता मात्र नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका असर सड़कों और दुकानों पर दिखना चाहिए।

नियमित जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश
प्रशासनिक अमले को निर्देशित किया गया है कि वे शहर के विभिन्न खाद्य संस्थानों, गोदामों और निर्माण इकाइयों की नियमित रूप से सघन जांच करें। इस अभियान की मुख्य रणनीतियाँ इस प्रकार हैं:

निरंतर सैंपलिंग: सभी प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों से नियमित अंतराल पर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाएंगे और उनकी लैब टेस्टिंग कराई जाएगी।

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मौके पर सीलिंग: यदि किसी स्थान पर भोजन बनाने की प्रक्रिया अत्यंत अस्वच्छ वातावरण में पाई जाती है या हाइजीन मानकों की अनदेखी होती है, तो उस परिसर को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाएगा।

दंडात्मक कार्यवाही और FIR: खाद्य सामग्री के अमानक या जानलेवा पाए जाने की स्थिति में संबंधित संचालकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में प्रशासन द्वारा FIR दर्ज कराकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

“जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मिलावटखोरी के विरुद्ध यह अभियान अब और भी अधिक आक्रामक होगा। अमानक सामग्री बेचने वालों को न केवल भारी जुर्माना भरना होगा, बल्कि उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।”

– शिवम वर्मा, कलेक्टर, इंदौर